भीषण गर्मी के बीच राजधानी लखनऊ में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए चलाए जा रहे बिजली चोरी विरोधी अभियान के दौरान चौपटिया विद्युत उपकेंद्र के तंबाकू मंडी क्षेत्र में बड़ा बवाल हो गया। मध्यांचल डिस्कॉम की रेड टीम ने पीक ऑवर्स में सघन चेकिंग अभियान चलाकर मौके पर 05 उपभोक्ताओं को बिजली चोरी करते हुए पकड़ा, जिनके खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।


लेकिन कार्रवाई के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब बिजली चोरी में संलिप्त लोगों ने इकट्ठा होकर पूरी टीम पर हमला बोल दिया। इस हमले में एक लाइनमैन गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि मौके पर मौजूद सहायक अभियंता, जूनियर इंजीनियर और अन्य कर्मचारियों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट की गई।
घटना के बाद देर रात थाना सहादतगंज में मेडिकल कराकर सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट, जानलेवा हमला, आपराधिक धमकी और दंगा भड़काने समेत 07 गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

सूत्रों के अनुसार, मध्य लेसा ज़ोन की रेड टीम और वितरण खंड की संयुक्त टीम चौपतिया बिजलीघर क्षेत्र में रात्रिकालीन विद्युत चोरी रोकथाम अभियान चला रही थी। इसी दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने टीम को घेरकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
घटना के बाद अभियंता संघ और जूनियर इंजीनियर संघ में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि लगातार बढ़ते हमलों और फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर पावर कॉरपोरेशन और मध्यांचल डिस्कॉम का शीर्ष प्रबंधन मौन बना हुआ है।

कर्मचारियों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब विभागीय कर्मचारी जान जोखिम में डालकर बिजली चोरी रोकने और जनता को निर्बाध बिजली देने के लिए मैदान में उतर रहे हैं, तब उनके ऊपर हमले हो रहे हैं और शीर्ष अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
अभियंता संगठनों ने सवाल उठाया है कि यदि अपने ही कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो फिर फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल कैसे बना रहेगा? कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि “अगर प्रबंधन सच में अभिभावक होता, तो अपने कर्मचारियों पर हमले पर इतनी खामोशी नहीं रहती।”








