कर्मचारियों को बंधक बनाकर फैक्ट्री में डकैती कर 6500 किलो कॉपर उठा ले गए बदमाश

लखनऊ। देवा रोड, चिनहट, लखनऊ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में ट्रांसफॉर्मर बनाने और रिपेयर करने वाली फैक्ट्री में शुक्रवार रात हथियारों से लैस नकाबपोश डकैतों ने कर्मचारियों को बंधक बनाकर डकैती करने का मामला प्रकाश में आया है। फैक्ट्री मालिक के अनुसार डकैत फैक्ट्री में करीब दो घंटे तक रहे और वहां रखे करीब 6500 किलो कॉपर क्वायल और अन्य सामान ट्रक में लादकर उठा ले गए। फैक्ट्री मालिक द्वारा सूचना देने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू किया। चिनहट कोतवाली में अज्ञात डकैतों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

बताते चले कि देवा रोड इंडस्ट्रियल एरिया में संजीव अग्रवाल की बालाजी ट्रांसफॉर्मर नाम से मेन्युफैक्चरिंग व रिपेयरिंग करने की फैक्ट्री है। उसमें बिजली विभाग के ट्रांसफॉर्मर बनते व रिपेयर किए जाते हैं। फैक्ट्री के एक हिस्से में बेकरी भी है। फैक्ट्री में शुक्रवार रात को सुपरवाइजर विमल कश्यप, कर्मचारी नितेश कुमार, विक्रम कश्यप, अजीत सिंह कश्यप, केयर टेकर चौथी यादव और सुरक्षाकर्मी राम आधार सो रहे थे।

 विमल, नितेश और विक्रम बेकरी की तरफ थे और अजीत चौथी और राम आधार ट्रांसफॉर्मर की फैक्ट्री में थे। रात करीब एक बजे सात-आठ नकाबपोश बदमाश घुस गए और सभी कर्मचारियों को एक कमरे में लाकर उनके हाथ पैर बांध दिए। डकैतों ने सभी के मोबाइल फोन भी ले लिए। लाइट बंद कर एक बदमाश उसी कमरे में हथियार के साथ मौजूद था। उसके बाद बदमाशों ने पूरी फैक्ट्री में रखे कॉपर वायर इकट्ठा किए। बदमाश करीब दो घंटे तक अराम से लूटपाट करते रहे। सुबह करीब तीन बजे एक गाड़ी बाहर आकर रुकी, जिसमें कॉपर के तार, सिलिंडर और अन्य सामान लोड करने के बाद डकैत धमकी देकर वहां से चले गए।

सुबह करीब 3ः55 बजे कर्मचारियों ने फैक्ट्री मालिक संजीव अग्रवाल को मामले की जानकारी दी तो उन्होंने पुलिस को बताया। डकैती की जानकारी होने पर जेसीपी क्राइम आकाश कुलहरि, डीसीपी ईस्ट आशीष श्रीवास्तव, एडीसीपी ईस्ट अली अब्बास समेत कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। फरेंसिक टीम ने भी छानबीन की। डीसीपी ईस्ट आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि बदमाश करीब 6500 किलो तांबे का तार ले गए हैं। बदमाशों की तलाश में पुलिस की पांच टीमों को लगाया गया है। वहीं, फैक्ट्री मालिक संजीव अग्रवाल का कहना है कि बदमाश करीब 75 टन तांबे का तार ले गए हैं, जिसकी कीमत 75 से 80 लाख रुपये है।

 फैक्ट्री की एक तरफ की दीवार में जालियां नहीं लगी हैं। कर्मचारी विकल कश्यप का कहना है कि शुरुआत में सात-आठ बदमाश चहारदीवारी फांदकर फैक्ट्री में दाखिल हुए थे। बदमाश सीधे उनके कमरे में आए और कंबल हटाकर उनके गर्दन पर नुकीली चीज सटाकर शोर मचाने पर जान से मारने की धमकी दी और हाथ-पांव बांध दिए। उसके बाद बाकी कर्मचारियों को पकड़कर उसी कमरे में लाकर सभी को बंधक बना दिया। डकैतों ने बाकी कर्मचारियों के आने के बारे में भी पूछा। उसके बाद सुबह करीब तीन बजे ट्रक आई और डकैत कॉपर क्वॉयल के साथ कर्मचारियों की साइकल, मोबाइल फोन व फैक्ट्री में रखे सिलिंडर भी उसमें लाद लिए। वह लोग कर्मचारियों के बिस्तर तक उठा ले गए। बदमाशों ने कर्मचारियों को जिस कमरे में बंधक बनाया था, उसमें बाहर से बेलन लगा दिया था। कर्मचारी विमल ने बताया कि किसी तरह हाथ खोलकर उन लोगों ने दीवार खोदने का प्रयास किया। कामयाब नहीं हुए तो वहां रखे रॉड से कमरे में लगे लोहे के दरवाजे में छेदकर बेलन खोला और बाहर निकले। उसके बाद 3ः55 बजे फैक्ट्री मालिक को सूचना दी थी।

पुलिस चौकी से 400 मीटर दूरी पर वारदात
डकैतों ने अपट्रॉन पुलिस चौकी से महज 400 मीटर दूरी पर स्थित फैक्ट्री में शुक्रवार की रात करीब ढाई घंटे तक डकैती डाली, लेकिन पुलिस को भनक नहीं लगी। इस घटना से पुलिस के गश्त पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस की छानबीन में यह भी सामने आया है कि डकैती डालने आए लोग स्पोर्ट्स शूज, जैकेट पहने थे और मफलर से चेहरा ढके हुए थे।

न सीसीटीवी और न ही सुरक्षा के लिए असलहा
बालाजी ट्रांसफॉर्मर फैक्ट्री वर्ष 2000 में शुरू हुई थी। मौजूदा समय फैक्ट्री में सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। चहारदीवारी पर चारों तरफ जालियां नहीं है। बुजुर्ग सिक्यॉरिटी मैन राम आधार के पास कोई गन नहीं रहती है। फैक्ट्री में कहीं भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं।

फुटेज में जाता दिखा ट्रक, नंबर नहीं दिखा
पुलिस ने आसपास की फैक्ट्रियों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो उसमें रात एक ट्रक (डीसीएम) जाती दिखी है, लेकिन अंधेरा होने की वजह से उसका नंबर पढ़ने में नहीं आ रहा है। फिलहाल पुलिस की टीमें फुटेज और हुलिया के आधार पर डकैतों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने लूटे गए मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वह बंद जा रहे है। पुलिस की सर्विलांस टीम को भी डकैतों को दबोचने के लिए लगा दिया गया है।

कर्मचारियों ने बताया कि करीब दो साल पहले फैक्ट्री में चोरी हुई थी। उस समय चोरों ने सीसीटीवी डैमेज कर दिया था, तब से सीसीटीवी नहीं लगा। वहीं, डकैती के पीछे किसी करीबी का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब बदमाशों तक पहुंचने के लिए फैक्ट्री के पूर्व कर्मचारियों के बारे में भी छानबीन कर रही है।

बिना क्रेन डकैतों ने ट्रक पर कैसे लादे क्वॉयल?
फैक्ट्री में कॉपर क्वॉयल के बंडल की लोडिंग और अनलोडिंग के लिए क्रेन की व्यवस्था की गई है। कॉपर क्वॉयल के बंडल क्रेन से ही लोड व अनलोड किए जाते हैं, लेकिन डकैतों ने 6500 किलो कॉपर क्वॉयल बिना क्रेन के कैसे लोड कर लिया? पुलिस इसी सवाल का जवाब तलाश रही है। इसीलिए पुलिस को इस घटना के पीछे कुछ घालमेल भी नजर आ रहा है। बैंकों से फैक्ट्री के दस्तावेजों की भी जांच करवाई जा रही है।

डीसीएम की तलाश में जुटीं पुलिस की टीमें
पुलिस को घटनास्थल के आसपास एक संदिग्ध डीसीएम नजर आई है। पुलिस की टीमें हर रूट पर उसी डीसीएम को तलाशने में जुटी हैं। सूत्रों का कहना है कि पुलिस को डीसीएम के बारे में कुछ अहम सुराग भी मिले हैं, जिसके आधार पर उसके चालक तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। एडीसीपी ईस्ट का कहना है कि कई बिंदुओं पर छानबीन की जा रही है।

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