51 सेकंड की CCTV फुटेज ने खड़े किए बड़े सवाल, बिजली विभाग बोला “सप्लाई बंद थी”, प्राधिकरण बोला “नाले में करंट था”—आखिर सच कौन छिपा रहा है?
UPPCL MEDIA | नोएडा
बारिश के पानी में मौत बह रही थी और सिस्टम दावा कर रहा था कि सब सुरक्षित है। नोएडा के सेक्टर-58 में 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की संदिग्ध मौत ने पूरे प्रदेश की बिजली सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आई 51 सेकंड की CCTV फुटेज में साफ दिखाई देता है कि आर्यन जैसे ही बिजली के खंभे के पास पहुंचते हैं, अचानक झटका खाकर गिर जाते हैं। उन्हें बचाने दौड़ा युवक भी करंट का अहसास होते ही पीछे हट जाता है।
अगर बिजली नहीं थी, तो झटका किस बात का था? अगर करंट नहीं था, तो लोग पास जाने से क्यों डर गए? और अगर खतरा नहीं था, तो हादसे के तुरंत बाद टूटी स्लैब बदलने की इतनी जल्दी क्यों पड़ी?
बिजली विभाग और प्राधिकरण के बयान आमने-सामने
एक तरफ बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता का कहना है कि बारिश के दौरान विद्युत आपूर्ति बंद थी, इसलिए करंट लगने का सवाल ही नहीं उठता।
दूसरी तरफ नोएडा प्राधिकरण के जीएम खुद स्वीकार कर रहे हैं कि CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर नाले में करंट उतरने की बात सामने आई है।
दो सरकारी एजेंसियों के ये विरोधाभासी बयान सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर सच कौन बोल रहा है और कौन अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है?
पोस्टमार्टम ने नहीं बताया कारण, लेकिन CCTV बहुत कुछ कह रही है
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण नहीं मिला है और विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। लेकिन CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों की बातें और मौके की परिस्थितियां यह संकेत जरूर देती हैं कि हादसा सामान्य नहीं था।
अब सवाल यह है कि—
- अगर बिजली बंद थी तो करंट कहां से आया?
- क्या पोल में लीकेज करंट था?
- क्या अर्थिंग फेल थी?
- क्या किसी निजी या अवैध कनेक्शन से करंट नाले में उतरा?
- क्या बिजली सुरक्षा ऑडिट सिर्फ कागजों में हो रहे हैं?
हादसे के बाद जागा सिस्टम
जिस स्थान पर टूटी स्लैब लंबे समय से खतरा बनी हुई थी, वहीं हादसे के बाद आनन-फानन में नई स्लैब रख दी गई। इससे साफ संदेश जाता है कि खतरे की जानकारी पहले से थी, लेकिन कार्रवाई तब हुई जब एक युवक की जान चली गई।
UPPCL MEDIA का सवाल
क्या हर बारिश में किसी बेटे की मौत के बाद ही बिजली विभाग और प्राधिकरण जागेंगे?
क्या CCTV वायरल होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर जांच के नाम पर फाइलें बंद कर दी जाएंगी?
प्रदेश में बिजली सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। फिर भी अगर बिजली के खंभे, खुले नाले और जलभराव मौत का जाल बने रहें तो इन व्यवस्थाओं की जवाबदेही कौन तय करेगा?
आर्यन अब लौटकर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी मौत यह जरूर पूछ रही है—क्या सिस्टम की लापरवाही की कीमत हमेशा आम नागरिक ही चुकाएगा?








