लखनऊ। राजधानी में बिजली मीटरों को कथित रूप से “सुस्त” करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की खबर ने बिजली विभाग और उपभोक्ताओं दोनों के बीच हलचल मचा दी है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कुछ मीटर वास्तविक खपत से काफी कम यूनिट दर्ज कर रहे हैं, जिससे राजस्व हानि और बिजली चोरी की आशंका बढ़ गई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मीटरों की सील तोड़कर अंदर तकनीकी छेड़छाड़ की जा रही है और बाद में नई सील लगाकर उन्हें सामान्य दिखाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल बिजली चोरी का मामला नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उपभोक्ताओं पर भी उठ रहे सवाल
जिन कनेक्शनों पर एसी, कूलर, गीजर और अन्य भारी विद्युत उपकरण लगातार चल रहे हैं, वहां अपेक्षाकृत बेहद कम यूनिट दर्ज होना जांच का विषय बन सकता है। बिजली विभाग पहले भी मीटर टैंपरिंग और बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाता रहा है।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था पहले से विवादों में
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल के महीनों में लाखों उपभोक्ताओं को बिल और बैलेंस देखने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
यूपीपीसीएल को स्मार्ट मीटर डैशबोर्ड और तकनीकी खामियों को लेकर संबंधित कंपनियों को नोटिस तक जारी करना पड़ा।
बड़ा सवाल
- क्या राजधानी में मीटरों को सुस्त करने वाला संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?
- सील टूटने और दोबारा लगने की घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी है?
- विभागीय निरीक्षण में ऐसे मामले पहले क्यों नहीं पकड़े गए?
- क्या इससे राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो रहा है?
UPPCL MEDIA की मांग
यदि किसी उपभोक्ता के मीटर में छेड़छाड़ पाई जाती है तो केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि ऐसे नेटवर्क को संरक्षण देने वाले तत्वों की भी पहचान होनी चाहिए। स्मार्ट मीटर परियोजना पर पहले से उठ रहे सवालों के बीच यह मामला निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करता है।
“ईमानदार उपभोक्ता पूरा बिल भरे और कुछ लोग मीटर सुस्त कराकर बिजली उड़ाएं, तो यह व्यवस्था के साथ अन्याय है।”
स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता, तकनीकी खामियों और उपभोक्ता शिकायतों को लेकर उत्तर प्रदेश में पहले भी जांच और समीक्षा की मांग उठती रही है।








