“बिजली विभाग या दंड विभाग?”—उपभोक्ता परेशान, इंजीनियर प्रताड़ित, पावर कॉर्पोरेशन पर सवालों की बौछार

बिजली विभाग की लापरवाही पर बड़ा एक्शन—लेकिन क्या सिर्फ कार्रवाई से सुधरेगी व्यवस्था?

ट्रांसफार्मर खराब होने पर 6 इंजीनियरअधिकारियों पर गिरी गाज,

उपभोक्ता अब भी झेल रहे कटौती और गलत बिल की मार

लखनऊ। गर्मियों में बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर पावर कॉर्पोरेशन ने सख्ती का डंडा तो चला दिया, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई समस्या का समाधान है या सिर्फ जिम्मेदारी से बचने का एक तरीका?

ट्रांसफार्मर खराब होने पर एक के बाद एक अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी गई—निलंबन, चार्जशीट, एडवर्स एंट्री। लेकिन क्या कभी यह पूछा गया कि ट्रांसफार्मर जल क्यों रहे हैं? क्या सिस्टम इतना मजबूत है कि बिना संसाधन के काम कर रहे इंजीनियर चमत्कार कर दें?

उपभोक्ता: “बिजली नहीं, परेशानी मिल रही है”

जमीनी हकीकत बेहद कड़वी है:

  • घंटों बिजली कटौती, खासकर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में
  • ट्रांसफार्मर जलने के बाद कई-कई दिन अंधेरा
  • 1912 पर शिकायत करने के बाद भी समाधान नहीं
  • स्मार्ट मीटर के नाम पर जबरन कटौती और बार-बार रिचार्ज का दबाव

उपभोक्ता पूछ रहे हैं—अगर समय पर बिजली नहीं दे सकते, तो फिर स्मार्ट सिस्टम किस काम का?

🔌 स्मार्ट मीटर: तकनीक या उपभोक्ता शोषण?

स्मार्ट मीटर को आधुनिक समाधान बताया गया, लेकिन यह आम जनता के लिए नई मुसीबत बन चुका है:

  • बैलेंस खत्म होते ही बिना चेतावनी बिजली कट
  • रिचार्ज के बाद भी कनेक्शन जोड़ने में देरी
  • गलत रीडिंग और मनमाने बिल

यह सिस्टम सुविधा से ज्यादा “डिजिटल दंड” बनता जा रहा है।

🧾 गलत बिलिंग: लूट या लापरवाही?

गलत बिलिंग अब अपवाद नहीं, आम बात बन चुकी है:

  • हजारों-लाखों के बिल उपभोक्ताओं को थमा दिए जाते हैं
  • सुधार के नाम पर हफ्तों की दौड़भाग
  • विभागीय दफ्तरों में सुनवाई नहीं

क्या यह तकनीकी गलती है या उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा हमला?

👷 इंजीनियर: “सिस्टम फेल, लेकिन दोष हमारा”

सबसे चिंताजनक स्थिति फील्ड इंजीनियरों की है:

  1. स्टाफ की भारी कमी, एक व्यक्ति पर कई क्षेत्रों की जिम्मेदारी
  2. संसाधनों का अभाव—ना पर्याप्त ट्रांसफार्मर, ना उपकरण
  3. 24 घंटे काम का दबाव, लेकिन सुरक्षा और सहयोग शून्य
  4. ऊपर से हर गलती पर सीधी कार्रवाई

जब सिस्टम ही कमजोर है, तो क्या सिर्फ इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाना न्याय है?

⚖️ सवाल जो पावर कॉर्पोरेशन से पूछे जाने चाहिए

  • ट्रांसफार्मर जलने की मूल वजहों पर क्या कार्रवाई हुई?
  • क्या हर क्षेत्र में पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध हैं?
  • स्मार्ट मीटर की खामियों को कब ठीक किया जाएगा?
  • गलत बिलिंग के लिए जिम्मेदार कौन—सिस्टम या कर्मचारी?

🔥 निष्कर्ष: कार्रवाई नहीं, जवाबदेही चाहिए

पावर कॉर्पोरेशन की यह नीति अब साफ दिख रही है—
“ऊपर से आदेश, नीचे सजा”

जब तक:

  • सिस्टम को मजबूत नहीं किया जाएगा
  • इंजीनियरों को संसाधन और सुरक्षाउपभोक्ताओं की समस्य

आखिरी सवाल: क्या पावर कॉर्पोरेशन सच में सुधार चाहता है, या सिर्फ अपनी नाकामी छुपाने के लिए कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को ढाल बना रहा है?

UPPCL MEDIA

"यूपीपीसीएल मीडिया" ऊर्जा से संबंधित एक समाचार मंच है, जो विद्युत तंत्र और बिजली आपूर्ति से जुड़ी खबरों, शिकायतों और मुद्दों को खबरों का रूप देकर बिजली अधिकारीयों तक तक पहुंचाने का काम करता है। यह मंच मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों की गतिविधियों, नीतियों, और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर केंद्रित है।यह आवाज प्लस द्वारा संचालित एक स्वतंत्र मंच है और यूपीपीसीएल का आधिकारिक हिस्सा नहीं है।

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