🔥 रसूख के आगे नियम बेबस! विभाग में कार्रवाई का दोहरा मापदंड
दक्षिणांचल में ‘निरीक्षण खेल’! 4.5 करोड़ की सामग्री पर साइन का रहस्य, एक अभियंता सस्पेंड — दूसरे पर संरक्षण….. 🔥 एक गलती पर निलंबन, दूसरे पर संरक्षण — दक्षिणांचल में किसका है हाथ?
🔥 इंदौर निरीक्षण रिपोर्ट में दो दिन की उपस्थिति दिखाई, जबकि एक दिन मुख्यालय में मीटिंग में मौजूद थे अधिकारी
🔥 RDSS मीटिंग में मौजूद अफसर की इंदौर में कैसे लगी हाजिरी?
🔥 फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट का खेल? 30 जनवरी को मुख्यालय में मौजूद अफसर, रिपोर्ट में इंदौर में साइन
🔥 पहले ‘संतोषजनक’ बताई सामग्री टेस्ट में फेल — फिर भी अधिकारी पर सवाल नहीं
🔥 नियम सिर्फ कमजोरों के लिए? ताकतवर अधिकारी पर क्यों खामोश विभाग

आगरा/लखनऊ। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) में सामग्री निरीक्षण से जुड़ा एक मामला इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में तीखी चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि लगभग 4.5 करोड़ रुपये मूल्य की सामग्री के निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बावजूद संबंधित अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि पूर्व में इसी प्रकार की अनियमितता के आरोप में एक अन्य अभियंता को निलंबित किया जा चुका है। इससे निगम में कार्रवाई के दोहरे मापदंड पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, मुख्य अभियंता (क्वालिटी सेल) के आदेश दिनांक 24 जनवरी 2026 के अनुपालन में एक अधिशासी अभियंता को इंदौर स्थित एक फर्म में लगभग 600 किलोमीटर एसीएसआर “वीज़ल” कंडक्टर के निरीक्षण के लिए भेजा गया था। निरीक्षण रिपोर्ट में 29 और 30 जनवरी 2026 को फैक्ट्री परिसर में उपस्थित होकर सामग्री को “संतोषजनक” बताते हुए डिस्पैच की अनुमति दिए जाने का उल्लेख किया गया।
लेकिन यहीं से पूरा मामला संदिग्ध हो जाता है।

⚡ एक ही दिन में दो शहरों में मौजूदगी?
दस्तावेजों के अनुसार 30 जनवरी 2026 को ही डीवीवीएनएल मुख्यालय, आगरा में आरडीएसएस परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई थी। बैठक की अध्यक्षता प्रबंध निदेशक ने की और उसमें निदेशक (तकनीकी), मुख्य अभियंता (आरडीएसएस), अधीक्षण अभियंता तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
बैठक की कार्यवृत्ति में संबंधित अधिकारी की मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज बताई जा रही है।
अब सवाल यह उठता है कि लगभग 600–650 किलोमीटर दूर इंदौर में निरीक्षण कर रहे अधिकारी उसी दिन आगरा मुख्यालय की बैठक में कैसे मौजूद थे?
दोनों शहरों के बीच की दूरी सड़क मार्ग से 12–13 घंटे और रेल मार्ग से लगभग 10–14 घंटे की है, ऐसे में एक ही दिन में दोनों जगह उपस्थिति दर्ज होना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
⚡ पहले “संतोषजनक”, फिर टेस्ट में फेल
मामला तब और गंभीर हो गया जब 10 फरवरी 2026 को निदेशक/मुख्य अभियंता स्तर पर उठी आपत्तियों के बाद सामग्री का संयुक्त पुनः निरीक्षण कराया गया।
निरीक्षण टीम में संबंधित फर्म के प्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और ईआरडीए वडोदरा के निरीक्षण अधिकारी शामिल थे।
पुनः निरीक्षण के दौरान ड्रम संख्या W/3/1274 की रिवाइंडिंग में एल्युमिनियम की एकल तार में जोड़ (Joint) पाया गया, जो भारतीय मानक (IS) और तकनीकी विनिर्देशों के विपरीत था।
इस गंभीर तकनीकी खामी के बाद निरीक्षण कार्य रोक दिया गया और सामग्री को अनुपयुक्त घोषित किया गया।
यानी जिस सामग्री को पहले निरीक्षण में “संतोषजनक” बताकर स्वीकृति दी गई थी, वही सामग्री टेस्टिंग में फेल हो गई।




🔥 रसूख के आगे नियम बेबस?
सूत्रों का दावा है कि प्रकरण सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी ने अपने प्रभाव और ऊपरी संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए मामले को दबाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कराने के लिए भी दबाव बनाया गया, ताकि मामला आगे न बढ़ सके।
सबसे हैरानी की बात यह है कि पूर्व में सामग्री निरीक्षण में अनियमितता के आरोप में एक अभियंता को तत्काल निलंबित कर दिया गया था, लेकिन इस प्रकरण में अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई।
इसी कारण विभाग में यह चर्चा तेज है कि नियम और कानून केवल कमजोर कर्मचारियों के लिए हैं, जबकि ताकतवर अधिकारियों पर कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है।
🚨 क्या शीर्ष स्तर को अंधेरे में रखा गया?
सूत्रों का यह भी कहना है कि पूरे प्रकरण की गंभीरता के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल तक वास्तविक स्थिति पूरी तरह नहीं पहुंचने दी गई।
चर्चा यह भी है कि मामला दक्षिणांचल डिस्कॉम के शीर्ष स्तर के संरक्षण में दबाया जा रहा है, जिससे विभागीय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही।
⚡ बड़े सवाल –
अब इस प्रकरण ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
🔥 दक्षिणांचल में डबल स्टैंडर्ड! एक अभियंता सस्पेंड, दूसरे पर रसूख का कवच
एक अभियंता निलंबित, दूसरे पर मेहरबानी — 4.5 करोड़ की सामग्री निरीक्षण पर सवाल
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🚨 रसूख के आगे नियम फेल!
टेस्टिंग में सामग्री फेल, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं
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🔎 अब निगाहें प्रबंधन पर
दक्षिणांचल डिस्कॉम में उठे इस मामले ने सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निगम प्रबंधन निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।








