शटडाउन के बिना मौत: हादसे के बाद इंजीनियर बने सहारा, कंपनी गायब!

UPPCL Media | विशेष रिपोर्ट

लखनऊ। राजधानी के कल्याणपुर क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर कार्यरत कुशल आउटसोर्सिंग संविदाकर्मी लाइनमैन परशुराम की ड्यूटी के दौरान हुई दर्दनाक मृत्यु ने एक बार फिर पावर सेक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, सेक्टर-25 पावर हाउस से संबद्ध जगरानी अस्पताल के पास 33,000 वोल्ट लाइन पर रात लगभग 1:00 से 1:30 बजे के बीच कार्य कराया जा रहा था। आरोप है कि संबंधित टीजी-2 एवं अवर अभियंता द्वारा विधिवत शटडाउन लिए बिना ही कर्मचारी को पोल पर चढ़ा दिया गया। अचानक विद्युत आपूर्ति चालू हो जाने से करंट प्रवाहित हुआ और परशुराम की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

घेराव, आक्रोश और तनाव

घटना के बाद मृतक के परिजन और सहयोगी संविदाकर्मियों ने सेक्टर-25 पावर हाउस का घेराव कर दिया। शव को सड़क पर रखकर जाम की तैयारी की जाने लगी। माहौल अत्यंत तनावपूर्ण हो गया था।

इस बीच लेसा अध्यक्ष चंद्रशेखर एवं बीकेटी 11 केवी के सहायक अभियंता विश्वकर्मा ने स्थिति को संभालने का प्रारंभिक प्रयास किया। बाद में 11 केवी के अधिशासी अभियंता अभय प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और आक्रोशित भीड़ व परिजनों से धैर्यपूर्वक वार्ता की।

सूत्रों के मुताबिक, परिजनों की वैध मांगों को स्वीकार करते हुए तत्काल सहायता का निर्णय लिया गया। इंजीनियर समूह ने आपसी सहयोग से पहले डेढ़ लाख रुपये, फिर अतिरिक्त डेढ़ लाख रुपये—कुल तीन लाख रुपये—अंतिम संस्कार एवं आपात सहायता हेतु उपलब्ध कराए।

इसके अतिरिक्त, परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्सिंग संविदा के रूप में कार्य देने तथा मृतक की पत्नी को पेंशन व अन्य देय भुगतान शीघ्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।

कंपनी की चुप्पी पर सवाल

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि जिस कंपनी के माध्यम से मैनपॉवर उपलब्ध कराया जाता है—Quess Corp Limited—उसका कोई अधिकृत प्रतिनिधि समाचार लिखे जाने तक मौके पर नहीं पहुंचा।

2007 में स्थापित और बेंगलुरु मुख्यालय वाली यह कंपनी 9 से अधिक देशों में 3000 से अधिक ग्राहकों को सेवाएं देने और 5 लाख से अधिक कर्मचारियों के नेटवर्क का दावा करती है। लेकिन सवाल यह है कि जब उसका कर्मचारी ड्यूटी के दौरान काल के गाल में समा गया, तब “परिवार का मुखिया” कहे जाने वाले प्रबंधन का कोई प्रतिनिधि संवेदना तक व्यक्त करने क्यों नहीं पहुंचा?

मजदूर यूनियन की ओर से भी सीमित उपस्थिति देखने को मिली। पुनीत राय को छोड़ अधिकांश पदाधिकारी अनुपस्थित रहे।

वर्टिकल व्यवस्था पर फिर सवाल

UPPCL Media का स्पष्ट मत है कि राजधानी लखनऊ में “वर्टिकल प्रणाली” लागू होने के बाद से दुर्घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि हुई है। शटडाउन प्रोटोकॉल, लाइन क्लीयरेंस, जिम्मेदारी निर्धारण और ऑन-ग्राउंड सुपरविजन जैसे मूलभूत तकनीकी मानकों पर शिथिलता गंभीर चिंता का विषय है।

गर्मी का मौसम अभी प्रारंभ भी नहीं हुआ है, और इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं। जब लोड चरम पर होगा, तब सुरक्षा प्रबंधन की स्थिति क्या होगी—यह विचार ही चिंताजनक है।

मूल प्रश्न

  • क्या बिना शटडाउन कार्य कराना आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में नहीं आता?
  • क्या आउटसोर्सिंग मॉडल में जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण है?
  • क्या मृतक संविदाकर्मियों की सुरक्षा सिर्फ कागजी निर्देशों तक सीमित है?

एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया। इंजीनियरों ने मानवता का परिचय दिया—पर क्या यही पर्याप्त है?

UPPCL Media यह मांग करता है कि निष्पक्ष जांच हो, दोष तय हो, और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर प्रोटोकॉल लागू किए जाएं।

(समाचार शैली | तीखा विश्लेषण | UPPCL Media)

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