वेतन कटौती की ‘फेस अटेंडेंस’ तलवार: क्या कर्मचारी अब मशीन से भी नीचे?

“डिजिटल कोड़ा” या प्रशासन? 10 बजे फेस अटेंडेंस नहीं तो वेतन कट — बिजली कर्मचारियों में उबाल

बिजली महकमे में एक नए मौखिक फरमान ने भूचाल ला दिया है। आरोप है कि वीडियो कॉन्फ्रेंस में शीर्ष स्तर से निर्देश दिया गया—सुबह 10 बजे तक “फेस अटेंडेंस” नहीं, तो वेतन अपने-आप कटेगा। ERP/ESS से सीधा लिंक… यानी मशीन तय करेगी कि कर्मचारी की जेब कितनी खाली होगी!

राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में बिजली कर्मचारियों के बीच एक नए मौखिक आदेश ने असंतोष की आग भड़का दी है। आरोप है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान शीर्ष स्तर से यह निर्देश दिया गया कि सुबह 10 बजे तक “फेस अटेंडेंस” दर्ज न करने वाले कर्मचारी की सैलरी स्वतः कट जाएगी। यह व्यवस्था ERP/ESS सिस्टम से सीधे लिंक कर दी गई है, जिससे समय के आधार पर वेतन कटौती ऑटोमैटिक हो सके।

कर्मचारियों का कहना है कि यह आदेश न केवल अव्यावहारिक है बल्कि श्रम कानूनों की भावना के भी विपरीत है।

फील्ड में रातभर, सुबह 10 बजे हाजिरी अनिवार्य?

बिजली आपूर्ति 24×7 आवश्यक सेवा है। जब कहीं फॉल्ट होता है तो इंजीनियर और लाइन स्टाफ पूरी रात क्षेत्र में रहकर आपूर्ति बहाल कराते हैं। फॉल्ट हो तो इंजीनियर और लाइन स्टाफ पूरी रात फील्ड में—कभी 6–7 बजे घर लौटना होता है। सवाल सीधा है: जो कर्मचारी रातभर ट्रांसफॉर्मर, फीडर, ब्रेकडाउन में जूझेगा, वह 10 बजे कार्यालय पहुंचकर “फेस अटेंडेंस” दर्ज करना कैसे संभव है?

राजधानी लखनऊ के चौक/अमीनाबाद जैसे इलाकों की ट्रैफिक हकीकत सब जानते हैं। दो घंटे पहले निकलिए, फिर भी समय पर पहुंचना चुनौती। क्या जमीनी हकीकत देखे बिना लिया गया यह फैसला उपभोक्ता हित में है? यदि अधिकारी फील्ड में रहकर आपूर्ति बहाल कराएगा तो सिस्टम उसे अनुपस्थित मानकर वेतन काट देगा?

रविवार और अवकाश भी ‘वर्किंग डे’?

सूत्र बताते हैं कि कई स्थानों पर छुट्टी के दिन भी एक साधारण कार्यालय ज्ञापन जारी कर कार्यालय खोल दिए जाते हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि सीमित स्टाफ (लगभग एक चौथाई) से पूरे क्षेत्र का काम लिया जा रहा है। देर रात तक ड्यूटी, रविवार को काम और फिर सुबह 10 बजे बायोमेट्रिक/फेस अटेंडेंस—क्या यह बंधुआ मजदूरी जैसी कार्यप्रणाली नहीं?

आवाज उठाने पर कार्रवाई की धमकी

सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले कर्मचारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन “डर का माहौल” बनाकर असंतोष दबाया जा रहा है।

कानूनी और मानवीय पहलू

श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्यूटी की प्रकृति फील्ड आधारित और आपातकालीन है, तो उपस्थिति प्रणाली में लचीलापन आवश्यक है। ऑटोमेटेड वेतन कटौती बिना मानवीय समीक्षा के लागू करना विवाद का विषय बन सकता है।

जरूरी प्रश्न यह है—

  • क्या फील्ड ड्यूटी का वैकल्पिक लॉग-इन प्रावधान है?
  • क्या रात्रि ड्यूटी के बाद अनिवार्य विश्राम का नियम लागू है?
  • क्या यह आदेश लिखित रूप में जारी हुआ है या केवल मौखिक निर्देश है?

उपभोक्ता हित बनाम प्रशासनिक कठोरता

बिजली विभाग का मूल उद्देश्य निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यदि इंजीनियर और कर्मचारी समय के डर से फील्ड से हटकर कार्यालय पहुंचने को मजबूर होंगे, तो इसका सीधा असर उपभोक्ता सेवा पर पड़ेगा।

अब देखना यह है कि प्रबंधन इस विवाद पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है। क्या व्यवस्था में व्यावहारिक संशोधन होगा या वेतन कटौती की “डिजिटल तलवार” इसी तरह कर्मचारियों के सिर पर लटकी रहेगी?

यूपीपीसीएल मीडिया का मानना है कि जरूरत अनुशासन की है, लेकिन अमानवीय कठोरता की नहीं। मशीन से वेतन कटेगा, पर क्या मशीन फील्ड की रातें गिनेगी? यदि प्रबंधन ने व्यावहारिक संशोधन नहीं किया तो यह “फेस अटेंडेंस” व्यवस्था कर्मचारी असंतोष को और भड़काएगी—जिसका सीधा असर उपभोक्ता सेवा पर पड़ेगा।

UPPCL Media इस मुद्दे पर प्रबंधन से स्पष्ट, लिखित स्पष्टीकरण की मांग करता है। जवाबदेही तय हो—वरना डिजिटल कोड़ा प्रशासन की विश्वसनीयता पर ही पड़ेगा।

  • UPPCL MEDIA

    "यूपीपीसीएल मीडिया" ऊर्जा से संबंधित एक समाचार मंच है, जो विद्युत तंत्र और बिजली आपूर्ति से जुड़ी खबरों, शिकायतों और मुद्दों को खबरों का रूप देकर बिजली अधिकारीयों तक तक पहुंचाने का काम करता है। यह मंच मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों की गतिविधियों, नीतियों, और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर केंद्रित है।यह आवाज प्लस द्वारा संचालित एक स्वतंत्र मंच है और यूपीपीसीएल का आधिकारिक हिस्सा नहीं है।

    OTHER UPPCL MEDIA PLATFORM NEWS

    यूपी में बिजली संकट पर मुख्यमंत्री सख्त, अधिकारियों को दी जवाबदेही की चेतावनी

    प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग और भीषण गर्मी को देखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अधिकारियों को बिजली व्यवस्था अधिक जवाबदेह और उपभोक्ता केंद्रित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा…

    ⚡ वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से चरमराई प्रदेश की बिजली व्यवस्था!

    प्रदेश की बिजली व्यवस्था आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह पावर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की तानाशाही नीतियां बनती जा रही हैं।…

    ⚡ गोरखपुर में बिजली विभाग के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, स्मार्ट मीटर से लेकर नंगे तारों तक उठे सवाल

    ⚡ गोरखपुर में बिजली विभाग के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, स्मार्ट मीटर से लेकर नंगे तारों तक उठे सवाल

    संविदाकर्मी पर मेहरबानी या सिस्टम की मिलीभगत? जानकीपुरम में ‘डुअल रोल’ का बड़ा खेल उजागर

    संविदाकर्मी पर मेहरबानी या सिस्टम की मिलीभगत? जानकीपुरम में ‘डुअल रोल’ का बड़ा खेल उजागर

    गोंडा में हाईटेंशन तार बना मौत का जाल: 10 साल की अनदेखी ने ली पत्रकार की जान, यूपीपीसीएल की लापरवाही पर उठा बड़ा सवाल

    गोंडा में हाईटेंशन तार बना मौत का जाल: 10 साल की अनदेखी ने ली पत्रकार की जान, यूपीपीसीएल की लापरवाही पर उठा बड़ा सवाल

    फर्जी तरीके से नौकरी पाने का मामला गरमाया — जांच के घेरे में जेई और तकनीशियन, विभाग में मचा हड़कंप

    फर्जी तरीके से नौकरी पाने का मामला गरमाया — जांच के घेरे में जेई और तकनीशियन, विभाग में मचा हड़कंप

    स्मार्ट मीटर पर संग्राम: इटौंजा की घटना ने खोली समन्वयहीनता और अव्यवस्था की पोल

    स्मार्ट मीटर पर संग्राम: इटौंजा की घटना ने खोली समन्वयहीनता और अव्यवस्था की पोल

    🔴 गोमती नगर में 400 KVA ट्रांसफार्मर चोरी — व्यवस्था पर सवाल, फील्ड इंजीनियरों की मेहनत पर विभागीय नीति भारी

    🔴 गोमती नगर में 400 KVA ट्रांसफार्मर चोरी — व्यवस्था पर सवाल, फील्ड इंजीनियरों की मेहनत पर विभागीय नीति भारी
    WhatsApp icon
    UPPCL MEDIA
    Contact us!
    Phone icon
    UPPCL MEDIA
    Verified by MonsterInsights