UPPCL की “वर्टिकल व्यवस्था” से उपभोक्ता बेहाल — टेंपरेरी कनेक्शन ठप, ऑफलाइन रसीदें विवादों में

UPPCL की “वर्टिकल व्यवस्था” आम उपभोक्ताओं पर करारा तमाचा — ज़मीनी हकीकत उजागर

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा लागू की गई तथाकथित वर्टिकल व्यवस्था आम उपभोक्ताओं की जिंदगी में सुधार तो नहीं ला सकी, लेकिन कागज़ी सुधारों का खंडन करते हुए जमकर अव्यवस्थाएँ पैदा कर दीं। और सबसे बड़ा झटका—यह अव्यवस्था उन्हीं सेवाओं को ठप कर रही है, जो वर्षों से बिना बाधा चल रही थीं।

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की नई वर्टिकल व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए नई परेशानियाँ लेकर आई है। विभाग में वर्षों से प्रचलित वह DUMMY अकाउंट सिस्टम—जिसके माध्यम से टेंपरेरी कनेक्शन (TC), रिकनेक्शन, झटपट कनेक्शन, परमानेंट डिस्कनेक्शन व शमन शुल्क जैसे भुगतान किए जाते थे—इसे अचानक बंद कर देने से ज़मीनी स्तर पर गंभीर दिक्कतें उत्पन्न हो गई हैं।

DUMMY अकाउंट बंद — और व्यवस्था धड़ाम!

शादी-विवाह, सामाजिक आयोजनों और मौसमी कार्यक्रमों के लिए लिए जाने वाले टेंपरेरी कनेक्शन अब उपखंड स्तर पर मिलना लगभग असंभव हो गया है। कारण—टीसी शुल्क जमा करने का कोई व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं। उपखंड कार्यालयों में बाबू/अकाउंटेंट की एक्सेस बंद होने से उपभोक्ताओं को दिनभर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वर्षों से उपखंड स्तर पर चल रहा DUMMY अकाउंट सिस्टम बिजली विभाग की छोटी-बड़ी सेवाओं की रीढ़ था।
इसी से जमा होते थे —

  • टेंपरेरी कनेक्शन (TC) शुल्क
  • रिकनेक्शन शुल्क
  • झटपट कनेक्शन
  • परमानेंट डिस्कनेक्शन
  • शमन शुल्क

शादी-विवाह, सामाजिक आयोजन, मौसमी कार्यक्रम जहाँ पहले घंटे भर में टेंपरेरी कनेक्शन दिया जाता था, आज वहाँ उपभोक्ता दर-दर भटक रहा है। कारण?
👉 “टीसी शुल्क जमा ही नहीं हो पा रहा।”
👉 “अकाउंट बंद है, ऑप्शन नहीं।”
👉 “ऊपर से आदेश हैं, हम क्या करें।”

🔸 UPPCL की नई व्यवस्था ने एक झटके में इसकी एक्सेस बंद कर दी, लेकिन… इसके स्थान पर कोई भी व्यवहारिक विकल्प नहीं दिया। यही वह निर्णय है जिसने पूरे विभाग को जमीनी स्तर पर पंगु कर दियापरिणाम जहाँ रोशनी होनी चाहिए थी, वहाँ अंधेरा फैल रहा है—और जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं।

ऑफलाइन रसीदों पर बड़ा सवाल — क्या हैं मान्य?

कई स्थानों पर मुख्य अभियंता के निर्देश पर ऑफलाइन शुल्क जमा कराया तो गया, पर उपभोक्ताओं को जो रसीदें दी जा रही हैं, उनकी वैधता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। मुख्य अभियंता के निर्देश पर ऑफलाइन भुगतान लिया जा रहा है।

🔸 लेकिन उपभोक्ता को दी जाने वाली रसीदें:

  • न सिस्टम में दर्ज
  • न ऑनलाइन दिखाई देती
  • न ही सत्यापन का कोई तरीका

विशेषज्ञों का कहना है कि:

“अगर कोई कहीं से भी रसीद प्रिंट करवा कर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर की नकल कर दे तो विभाग उसे कैसे सत्यापित करेगा?” इससे फ्रॉड की संभावना अत्यधिक बढ़ गई है, जबकि उपभोक्ता की सुरक्षा का कोई स्पष्ट तंत्र मौजूद नहीं। यानी UPPCL की नई व्यवस्था ने फ्रॉड का दरवाज़ा चौड़ा खोल दिया है, और उपभोक्ता असुरक्षा के दलदल में धँस रहा है।

DUMMY अकाउंट बंद, लेकिन विकल्प नहीं

वर्षों से चल रही वह प्रणाली, जिसमें हर उपखंड के अकाउंटेंट के पास एक विशेष DUMMY अकाउंट की एक्सेस होती थी, उसे वर्टिकल व्यवस्था में पूर्णतः निष्क्रिय कर दिया गया। यही अकाउंट छोटे-छोटे शुल्क और तत्काल सेवाओं को सक्षम बनाता था।

उसके बंद होने के बाद:

  • उपखंड स्तर की कार्यप्रणाली ठप
  • त्वरित सेवाओं में जमकर देरी
  • उपभोक्ता सरकार-विभाग दोनों से निराश

जमीनी कर्मचारियों के हाथ बाँध दिए गए

उपखंड स्तर के बाबू/अकाउंटेंट, जो रोज़मर्रा की बिजली सेवाओं की नब्ज़ संभालते थे, अब व्यवस्था की चाबी उनसे छीन ली गई है। उन्हें न भुगतान स्वीकार करने की अनुमति… न रसीद जारी करने का साधन … न शिकायत निपटाने का अधिकार. और ऊपर से आदेश—“वर्टिकल व्यवस्था सफल है।”

🔸 जनहित में सवाल — क्यों नहीं बहाल की जाएगी पुरानी व्यवस्था?

जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और उपभोक्ता लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि “जब तक विभाग वर्टिकल व्यवस्था को पूरी तरह सुचारु नहीं कर लेता, तब तक उपखंड स्तर पर DUMMY अकाउंट को पूर्व की भांति कार्यशील किया जाए।”

क्योंकि इसी व्यवस्था से:

  • टेंपरेरी कनेक्शन तत्काल मिलता था
  • शुल्क जमा करने की प्रक्रिया सरल थी
  • ऑफलाइन-ऑनलाइन दोनों का स्पष्ट रिकॉर्ड बनता था
  • उपभोक्ता भ्रमित नहीं रहता था

उपभोक्ता—सबसे निचले पायदान पर फिर से कुचला गया

यह व्यवस्था उपभोक्ता सेवा को त्वरित बनाने के उद्देश्य से लागू की गई थी, लेकिन नतीजा इसके उलट—

  • सेवाएँ धीमी
  • प्रक्रिया जटिल
  • भुगतान असुरक्षित
  • काम अटका हुआ
  • और उपभोक्ता का समय व पैसा बर्बाद

🔔 UPPCL Media की मांग — स्पष्ट, कठोर और जनहित में

1️⃣ उपखंड स्तर पर DUMMY अकाउंट को तत्काल सक्रिय किया जाए
2️⃣ ऑफलाइन रसीदों का डिजिटल सत्यापन सिस्टम लागू किया जाए।
3️⃣ टेंपरेरी कनेक्शन प्रक्रिया को पूर्ववत सरल और त्वरित किया जाए।
4️⃣ वर्टिकल व्यवस्था की जमीनी समीक्षा पारदर्शी तरीके से हो।

जनहित का बड़ा सवाल

जब पुरानी व्यवस्था सरल, सुरक्षित और कारगर थी, तो उसे बिना विकल्प दिए बंद क्यों कर दिया गया? जब टेंपरेरी कनेक्शन जैसी अत्यावश्यक सेवा बंद जैसी स्थिति में है, तो उपभोक्ताओं की परेशानी का जिम्मेदार कौन? और सबसे बड़ा सवाल … क्या UPPCL मैदान में उतरकर यह जांचेगा कि उसकी नई व्यवस्था ने जमीनी उपभोक्ता को क्या झेला दिया है?

UPPCL के लिए यह सुधार हो सकता है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह सुधार नहीं, एक सज़ा साबित हो रहा है। UPPCL की वर्टिकल व्यवस्था का उद्देश्य भले ही सुधार रहा हो, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उपभोक्ता ही सबसे अधिक त्रस्त हैं। टेंपरेरी कनेक्शन जैसी बुनियादी सेवाएँ रुक गई हैं और ऑफलाइन रसीदों पर उठ रहे सवाल गंभीर जोखिम की ओर इशारा कर रहे हैं।

जनहित में आवश्यक है कि विभाग इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर पूर्ववर्ती व्यवस्था को पुनः सक्रिय करे—ताकि आम उपभोक्ता अनावश्यक परेशानी और संभावित धोखाधड़ी से बच सके।

  • UPPCL MEDIA

    "यूपीपीसीएल मीडिया" ऊर्जा से संबंधित एक समाचार मंच है, जो विद्युत तंत्र और बिजली आपूर्ति से जुड़ी खबरों, शिकायतों और मुद्दों को खबरों का रूप देकर बिजली अधिकारीयों तक तक पहुंचाने का काम करता है। यह मंच मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों की गतिविधियों, नीतियों, और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर केंद्रित है।यह आवाज प्लस द्वारा संचालित एक स्वतंत्र मंच है और यूपीपीसीएल का आधिकारिक हिस्सा नहीं है।

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