मात्र 25 दिन का बिजली बिल आया 355 करोड़ रुपये…उपभोक्ता के उड़े होश

हरियाणा। सोनीपत जिले में बिजली विभाग ने 355 करोड़ रुपये का गलत बिल भेजा, जिससे एक उपभोक्ता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस घटना में विभाग ने तकनीकी खराबी का हवाला दिया और सभी बिलों को सुधार लिया। यह मामला बिजली बिलिंग प्रणाली की खामियों को उजागर करता है, और भविष्य में सुधार की आवश्यकता पर जोर देता है।

हरियाणा के सोनीपत जिले में स्थित गन्नौर के उमेदगढ़ गांव के निवासी लवेश गुप्ता को बिजली विभाग द्वारा भेजा गया 355 करोड़ रुपये का बिजली बिल देख कर उनके होश उड़ गए। यह बिल सिर्फ 25 दिनों का था और इसमें अनेक प्रकार के शुल्कों की गलतियां की गई थीं, जिन्हें देखकर लवेश गुप्ता चकित रह गए। उन्होंने तत्काल बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और मामले की जानकारी दी। विभाग ने इसे एक तकनीकी खराबी बताया और दावा किया कि ऐसी गलती 16 अन्य उपभोक्ताओं के बिल में भी हुई थी, जो अब ठीक कर दिए गए हैं।

बिजली विभाग ने इस गलती को तकनीकी खराबी के रूप में स्वीकार किया। सिटी एसडीओ सचिन दहिया ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं ने हाल ही में अपना बिजली लोड बढ़वाया था, उनके बिलों में यह गड़बड़ी आई थी। कुल मिलाकर 16 उपभोक्ताओं के बिलों में यह समस्या आई, जिन्हें विभाग ने सुधार लिया और सभी उपभोक्ताओं को इसके बारे में सूचित भी किया। विभाग का कहना था कि इस प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी केवल लोड बढ़वाने वाले उपभोक्ताओं के बिलों में हुई है, लेकिन अन्य उपभोक्ताओं के बिलों में कोई त्रुटि नहीं पाई गई।

लवेश गुप्ता को जो 355 करोड़ रुपये का बिजली बिल भेजा गया, उसमें विभिन्न प्रकार के चार्ज शामिल थे, जो कि बहुत अधिक और अव्यवस्थित थे। इनमें से कुछ प्रमुख चार्ज इस प्रकार थे:
फिक्स चार्ज: 33,904 रुपये
एनर्जी चार्ज: 1,99,49,72,648 रुपये
फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट: 14,09,99,128 रुपये
पीएलई चार्ज: 1,34,99,93,541 रुपये
इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी: 2,99,99,814 रुपये
म्युनिसिपल टैक्स: 4,27,20,113 रुपये

इन सबको जोड़ने पर कुल बिल 355 करोड़ रुपये के आसपास बनता था। लवेश गुप्ता के अनुसार, इतनी बड़ी रकम देखकर न केवल उनका भरोसा टूटा, बल्कि उन्हें विभाग की बिलिंग प्रणाली पर भी सवाल उठाने पर मजबूर किया। उन्होंने अधिकारियों से इस तकनीकी गड़बड़ी को जल्द ठीक करने की अपील की और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए विभाग को अपनी प्रणाली को और मजबूत करना चाहिए। इससे उपभोक्ताओं का समय और पैसा दोनों बचेंगे।

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