75 हजार बकाया पर कटा था कनेक्शन, फिर कैसे चलती रही लाखों की बिजली चोरी?
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी खबर लिखे जाने तक उपभोक्ता की बिजली सप्लाई चालू रही। इससे साफ जाहिर होता है कि विभाग के भीतर बकायेदारों और बिजली चोरों के प्रति कितनी नरमी बरती जा रही है, जबकि अपने ही कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को नजरअंदाज किया जा रहा है। जहां आम उपभोक्ताओं का कनेक्शन ₹3000-₹5000 बकाया पर काट दिया जाता है, वहीं लाखों रुपये बकाया होने के बावजूद यह कनेक्शन आखिर कैसे चलता रहा? न समय पर कनेक्शन कटा, न फोर्स पीडी हुई और न ही बिजली चोरी रोकने की गंभीर कार्रवाई दिखाई दी। मुख्य अभियंता बीपी सिंह का “3 लाख उपभोक्ता हैं, किस-किस पर नजर रखें” वाला बयान विभागीय लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सबसे दुखद यह कि अभियंताओं से मारपीट के बाद भी अधिकारी मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझ सके।

लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में बिजली चोरी पकड़ने गई विद्युत विभाग की टीम पर हुए जानलेवा हमले ने सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पूरे पावर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवर अभियंता अशोक कुमार व उनकी टीम पर लाठी-डंडों, बेल्ट और लोहे की रॉड से हमला किया गया, इतना ही नहीं टीम पर पालतू कुत्ते छोड़ने और सॉड से वार करने तक के आरोप लगे हैं। घटना के बाद अभियंताओं में भारी आक्रोश है, जबकि शीर्ष अधिकारी अब भी चुप्पी साधे हुए हैं।
मामला सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं है। यह घटना यूपी की बिजली व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार, वर्टिकल सिस्टम की विफलता, बकाया प्रबंधन की लापरवाही और अधिकारियों की संवेदनहीनता की भी पोल खोल रही है।
समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों, स्थानीय सूत्रों और यूपीपीसीएल मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार उपभोक्ता अजय दीक्षित पुत्र महेंद्र दीक्षित का LMV-2 श्रेणी का कनेक्शन संख्या 3366506055 लंबे समय से भारी बकाए में चल रहा था। वर्टिकल व्यवस्था लागू होने से पहले लगभग ₹75 हजार बकाया होने पर तत्कालीन अवर अभियंता अशोक कुमार ने उसका संयोजन काट दिया था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कटे हुए कनेक्शन को आखिर किसकी मिलीभगत से दोबारा जोड़ दिया गया? आरोप है कि वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद किसी संविदा कर्मी की मदद से चोरी से लाइन जोड़कर उपभोक्ता लगातार बिजली उपयोग करता रहा और विभाग आंखें मूंदे बैठा रहा।
अब जो बिल सामने आया है, वह एक लाख रुपये से अधिक का है। बिल की कॉपी के अनुसार उपभोक्ता पर ₹1,02,522 तक की देनदारी दर्शाई गई है। इसके बावजूद सप्लाई चालू रहना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
भाजपा सरकार में ₹3000 पर कटता कनेक्शन, यहां लाखों पर भी मेहरबानी क्यों?
प्रदेश में आम उपभोक्ताओं का कनेक्शन मामूली बकाया पर काट दिया जाता है। कई जगह ₹3000-₹5000 बकाया होने पर फोर्स पीडी तक कर दी जाती है, लेकिन यहां लाखों का बकाया, बिजली चोरी और हमला—तीनों के बाद भी सप्लाई चालू रहना आखिर क्या दर्शाता है? “कटे कनेक्शन से चलती रही चोरी की बिजली, अधिकारी सोते रहे”

क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर विभाग के भीतर गहरी सेटिंग और संरक्षण का खेल चल रहा है?
“ऐसे तो लोग जोड़ लेते हैं…” — मुख्य अभियंता का बयान बना चर्चा का विषय
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा मुख्य अभियंता बीपी सिंह के कथित बयान को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कहा — “ऐसे तो लोग जोड़ लेते हैं… तीन लाख उपभोक्ता हैं, किस-किस पर नजर रखें।”
यूपीपीसीएल मीडिया का सवाल है कि अगर लाखों के बकायेदार, चोरी करने वाले और विभागीय टीम पर हमला करने वाले उपभोक्ता भी सिस्टम की नजर से बाहर हैं, तो फिर यह व्यवस्था आखिर चल कैसे रही है?
और सबसे बड़ी बात — इतनी गंभीर घटना के बाद भी मुख्य अभियंता मौके पर पहुंचना उचित नहीं समझते। फोन पर हालचाल लेना ही क्या उनकी जिम्मेदारी पूरी कर देता है?
अगर यही घटना उनके अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ हुई होती, तब भी क्या वे सिर्फ फोन पर जानकारी लेकर शांत बैठ जाते?

अभियंता संघ में भारी आक्रोश, लेकिन शीर्ष प्रबंधन मौन
घटना के बाद अभियंता संघ और जूनियर इंजीनियर संघ में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार बिजली चोरों, दबंगों और बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली टीमें असुरक्षित होती जा रही हैं।
सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि पावर कॉरपोरेशन और मध्यांचल डिस्कॉम का शीर्ष नेतृत्व पूरी घटना पर चुप्पी साधे हुए है। कर्मचारियों में यह चर्चा आम है कि “अगर अभिभावक अपने ही परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए खड़ा न हो, तो फिर ऐसे नेतृत्व का क्या मतलब?”
वीडियो में दिखी खुलेआम बिजली चोरी
सूत्रों के मुताबिक पड़ोसी मकान से बनाए गए वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि बाईपास कर खुलेआम बिजली चोरी की जा रही थी। टीम मौके पर उसी शिकायत की जांच करने पहुंची थी।
यानी मामला केवल मारपीट का नहीं, बल्कि—
- बिजली चोरी
- सरकारी कार्य में बाधा
- विभागीय टीम पर हमला
- लाखों का बकाया
- अवैध रूप से कटे कनेक्शन को जोड़ना
—इन सभी गंभीर मामलों से जुड़ा हुआ है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
- 75 हजार बकाया पर काटा गया कनेक्शन दोबारा कैसे जुड़ा?
- किस संविदा कर्मी या अधिकारी की मिलीभगत थी?
- लाखों का बकाया होने के बावजूद सप्लाई क्यों चालू रही?
- घटना के बाद भी तुरंत फोर्स पीडी क्यों नहीं हुई?
- शीर्ष अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?
- क्या बिजली चोरों के हौसले विभागीय ढिलाई से बढ़ रहे हैं?
“मीटर ही उखाड़ लेना चाहिए”
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि जब एक उपभोक्ता खुलेआम चोरी करे, लाखों बकाया रखे और विभागीय टीम पर हमला तक कर दे, तब सिर्फ कनेक्शन काटना पर्याप्त नहीं है। ऐसे मामलों में मीटर उखाड़कर कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई टीम पर हमला करने की हिम्मत न कर सके।








