लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) एक बार फिर अपनी कार्यशैली को लेकर हाईकोर्ट की सख्त निगरानी में आ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे, जिसके बाद MVVNL के प्रबंध निदेशक (MD) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होना पड़ा। सुनवाई के दौरान विभाग को तीखी नाराजगी और फटकार का सामना करना पड़ा।

मामला WRIT-A No. 3843/2026, सुनील कुमार बनाम यूपीपीसीएल से जुड़ा है। कोर्ट में विभाग की ओर से दावा किया गया कि कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट 24 अप्रैल 2026 को तैयार कर ली गई थी। लेकिन कर्मचारी पक्ष ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि चार्जशीट वास्तव में 11 मई 2026 को ई-मेल के जरिए भेजी गई और उसकी हार्ड कॉपी कोर्ट में दी गई।
यहीं से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। कोर्ट ने पूछा कि अगर चार्जशीट पहले तैयार थी तो उसे समय पर कर्मचारी को क्यों नहीं दिया गया? इस विरोधाभास पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और विभागीय प्रक्रिया पर गंभीर नाराजगी जताई।
एमडी से जवाब तलब, अधिकारियों की जवाबदेही तय
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने यूपीपीसीएल के एमडी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश कराया। साथ ही संबंधित जिम्मेदार अधिकारी रिकॉर्ड के साथ कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने साफ कर दिया कि विभागीय मामलों में लापरवाही और मनमानी अब नहीं चलेगी।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 14 मई 2026 को सुबह 11:30 बजे तय करते हुए आदेश दिया कि जिम्मेदार अधिकारी रिकॉर्ड के साथ दोबारा उपस्थित रहें और एमडी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ें।
कर्मचारियों में चर्चा तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विभागीय कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में लंबे समय से नियमों की अनदेखी, दबाव और मनमानी कार्रवाई के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब मामला सीधे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
बड़े सवाल
- क्या यूपीपीसीएल में विभागीय कार्रवाई नियमों के तहत हो रही है?
- चार्जशीट समय पर कर्मचारी को क्यों नहीं दी गई?
- आखिर कोर्ट को एमडी तक को तलब कर फटकार क्यों लगानी पड़ी?
- क्या विभाग में जवाबदेही खत्म हो चुकी है?
अब 14 मई की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। अगर विभाग संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया तो मामला और गंभीर हो सकता है।








