बिजनेस प्लान करोड़ों का, लेकिन बस्ती तक नहीं पहुंची एक तार की रोशनी
सोनभद्र (लहास) की बैरिहवा बस्ती में न्याय पंचायत लहास अंतर्गत ग्राम पंचायत मूर्तियां की बैरिहवा बस्ती आज भी विकास के सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। लगभग 30 घरों की आबादी आजादी के दशकों बाद भी स्थायी बिजली कनेक्शन से वंचित है।
कभी लगाए गए सोलर पैनल अब कबाड़ बन चुके हैं, जिससे शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे की चादर में डूब जाता है। बच्चों की पढ़ाई बाधित है, महिलाओं का घरेलू काम प्रभावित है और रात में सुरक्षा का भी गंभीर संकट बना रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आशीष गोयल के कार्यकाल में भारी-भरकम बिजनेस प्लान, स्मार्ट सिस्टम और विद्युतीकरण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तब बैरिहवा जैसी बस्तियां आज भी रोशनी की एक किरण के लिए तरस क्यों रही हैं?
- क्या योजनाएं सिर्फ फाइलों और बैठकों तक सीमित हैं?
- क्या गांवों की बदहाली पर विभाग की नजर नहीं पड़ती?
या फिर जमीनी हकीकत को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
ग्रामीणों — रामअवतार, सुनील, रामअधार, रामकिशुन, पंकज, रमेश, शंभू, पप्पू, रविंदर, रामलाल, राजकुमार और धर्मेंद्र — ने प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
UPPCL MEDIA का अहम सवाल:
“जब 30 घरों तक बिजली नहीं पहुंची, तो करोड़ों के बिजनेस प्लान का आखिर फायदा किसे?”








