बिना सबूत सस्पेंड, बिना चार्जशीट कार्रवाई!
हाईकोर्ट सख्त: MD रिया केजरीवाल को VC के जरिए पेश होने का आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए बड़ा झटका दिया है।
सहायक अभियंता (मीटर-1) सुनील कुमार के निलंबन मामले में कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए अब प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल को भी वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दे दिया है।

पहले सस्पेंड, बाद में वजह तलाशो?
16 मार्च 2026 को सहायक अभियंता सुनील कुमार को “वर्टिकल सिस्टम लागू करने में रुचि न लेने”, उपभोक्ताओं की शिकायत और कार्यों में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।
लेकिन जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो विभाग की कार्रवाई खुद कटघरे में खड़ी हो गई।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में बताया गया कि:
- वर्टिकल सिस्टम 1 फरवरी 2026 से लागू हुआ
- अधिकारी ने 4 फरवरी 2026 को ही कार्यभार संभाला
- निलंबन आदेश में कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया गया
- आज तक चार्जशीट तक जारी नहीं की गई
यानी बिना जांच पूरी किए और बिना आरोप साबित किए सीधे निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए विभागीय रिकॉर्ड तलब कर लिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारी पूरे रिकॉर्ड के साथ उपस्थित हों। साथ ही प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि आखिर बिना चार्जशीट और बिना साक्ष्य इतनी बड़ी कार्रवाई किस आधार पर की गई।
विभागीय कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या अब विभाग में “पहले सस्पेंड, बाद में जांच” का सिस्टम चल रहा है?
- अगर आरोप गंभीर थे तो चार्जशीट क्यों नहीं दी गई?
- क्या कर्मचारियों और अभियंताओं पर दबाव बनाने के लिए कार्रवाई की जा रही है?
- क्या नियम-कायदे सिर्फ कागजों में सीमित रह गए हैं?
कर्मचारियों में भारी नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक विभाग के अभियंताओं और कर्मचारियों में इस कार्रवाई को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। कर्मचारी संगठन इसे “दमनात्मक और तानाशाही रवैया” बता रहे हैं।
अंदरखाने चर्चा यह भी है कि “वर्टिकल सिस्टम” के नाम पर अफसरों पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है और बिना पर्याप्त जांच के निलंबन जैसे कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।
12 मई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब पूरे बिजली विभाग की नजर 12 मई 2026 की सुनवाई पर टिकी है, जब हाईकोर्ट के सामने विभागीय कार्रवाई का सच सामने आएगा और प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल समेत जिम्मेदार अधिकारियों को अपने फैसले का जवाब देना होगा।








