प्रीपेड से पोस्टपेड करने पर दोबारा जुड़ेगी सिक्योरिटी मनी, विभागीय असमंजस से उपभोक्ताओं में नाराजगी
लखनऊ/कानपुर। प्रदेश में स्मार्ट मीटर व्यवस्था एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की नीतियों में लगातार बदलाव और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव ने उपभोक्ताओं को असमंजस में डाल दिया है। अब प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड कराने की प्रक्रिया में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सिक्योरिटी मनी फिर बनेगी सिरदर्द
जब पहले पारंपरिक पोस्टपेड मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदला गया था, तब उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी मनी को उनके बिल में समायोजित कर दिया गया था। लेकिन अब यदि उपभोक्ता दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में लौटते हैं, तो यही सिक्योरिटी मनी फिर से वसूली जाएगी—और वह सीधे बिजली बिल में जोड़कर।
ऊर्जा विभाग के सूत्रों के मुताबिक यह राशि औसतन डेढ़ महीने के बिजली बिल के बराबर होती है, जिससे एकमुश्त बिल काफी बढ़ सकता है।
एरियर और कटौती से पहले ही परेशान उपभोक्ता
प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद से ही उपभोक्ता एरियर बकाया और बार-बार होने वाली कटौती से परेशान हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि हर रिचार्ज पर 10 से 25 प्रतिशत तक राशि एरियर के नाम पर काट ली जाती है, जिससे बैलेंस होने के बावजूद बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है।
इस अव्यवस्था ने उपभोक्ताओं में भ्रम और गुस्सा दोनों बढ़ा दिया है।
नीति स्पष्ट नहीं, विभाग खुद असमंजस में
केस्को ने फिलहाल पोस्टपेड मीटरों को प्रीपेड में बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। वहीं, प्रीपेड से पोस्टपेड में वापसी के लिए अभी तक स्पष्ट एसओपी जारी नहीं की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा मंत्रालय द्वारा प्रीपेड की अनिवार्यता हटाने के बाद स्थिति और उलझ गई है। अब यह उपभोक्ताओं की पसंद पर निर्भर होगा, लेकिन लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है।
बढ़ते बिल से फिर भड़क सकता है विरोध
विशेषज्ञों का मानना है कि जब उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ा हुआ बिल मिलेगा—जिसमें सिक्योरिटी मनी भी जोड़ी जाएगी—तो विरोध और तेज हो सकता है। पहले से ही स्मार्ट मीटर के खिलाफ चल रहा असंतोष इस फैसले से और उग्र होने की संभावना है।
क्या बोले अधिकारी
केस्को के मीडिया प्रभारी एवं एक्सईएन देवेंद्र वर्मा के अनुसार,
“फिलहाल स्मार्ट पोस्टपेड मीटरों को प्रीपेड में बदलने की प्रक्रिया स्थगित है। आगे की कार्रवाई UPPCL के निर्देशों के अनुसार ही होगी। पोस्टपेड में सिक्योरिटी मनी जमा करानी होती है।”
यूपीपीसीएल मीडिया का मानना है कि
स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य पारदर्शिता और सुविधा था, लेकिन बिना स्पष्ट नीति और उपभोक्ता हितों की अनदेखी ने इसे विवादों में धकेल दिया है। बार-बार नियम बदलने और आर्थिक बोझ बढ़ाने से उपभोक्ताओं का भरोसा डगमगा रहा है।
यदि जल्द ही स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई, तो यह योजना विरोध और अविश्वास का बड़ा कारण बन सकती है।







