⚡ पावर कॉर्पोरेशन में मौत की हैट्रिक: 24 घंटे में तीन संविदाकर्मियों की दर्दनाक मौत

“वर्टिकल अ-व्यवस्था” पर उठे सवाल — आखिर कब तक जाती रहेगी जान?”

लखनऊ। बिजली विभाग में एक बार फिर संविदाकर्मियों की मौत ने पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज़ 24 घंटे के भीतर तीन-तीन घटनाएं—पहला सोनभद्र, दूसरा नूरबाड़ी, और अब तीसरा मामला राजधानी लखनऊ के कल्याणपुर से सामने आया है।

क्या यह महज संयोग है या विभागीय लापरवाही की खौफनाक श्रृंखला?

मृतक परशुराम गोल घेरे में
मृतक परशुराम गोल घेरे में

⚡ कल्याणपुर में 33 केवी लाइन पर मौत

लखनऊ के कल्याणपुर स्थित 33 केवी पावर हाउस में कार्यरत कुशल आउटसोर्सिंग संविदाकर्मी लाइनमैन परशुराम की देर रात ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मृत्यु हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेक्टर-25 पावर हाउस, कल्याणपुर का कर्मचारी परशुराम जगरानी अस्पताल के पास 33,000 वोल्ट लाइन के पोल पर रात लगभग 1 से 1:30 बजे के बीच कार्य कर रहा था। आरोप है कि संबंधित टीजी-2 व अवर अभियंता द्वारा बिना शटडाउन लिए ही उसे लाइन पर चढ़ा दिया गया। बताया जा रहा है कि अचानक विद्युत आपूर्ति चालू हो जाने से करंट प्रवाहित हुआ और परशुराम की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

नोट: उपरोक्त आरोप सूत्रों के आधार पर हैं। यूपीपीसीएल मीडिया इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।

❓ बड़ा सवाल — क्या कभी किसी स्थायी सरकारी लाइनमैन की हुई है ऐसी मौत?

संविदाकर्मियों की मौत पर मुआवज़े की घोषणा और जांच के आश्वासन अक्सर सुनाई देते हैं, लेकिन क्या व्यवस्था में कोई ठोस सुधार हुआ?

  • न्यूनतम वेतन भी समय पर नहीं
  • सुरक्षा उपकरणों की कमी
  • बिना शटडाउन कार्य का दबाव
  • जिम्मेदारी तय होने से पहले फाइलों में दफन मामले

क्या “वर्टिकल व्यवस्था” वास्तव में जवाबदेही तय कर पाई है या सिर्फ आदेशों का जाल बनकर रह गई है?

⚠️ 24 घंटे, तीन मौतें — सिस्टम मौन क्यों?

  1. सोनभद्र — हादसा
  2. नूरबाड़ी — शॉर्ट सर्किट की चपेट
  3. कल्याणपुर, लखनऊ — 33 केवी लाइन पर करंट

एक के बाद एक घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल कागज़ों तक सीमित हैं।

🗣️ परिवार का सहारा छिना

परशुराम जैसे संविदाकर्मी न्यूनतम दर पर काम करते हुए अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। न स्थायित्व, न सामाजिक सुरक्षा, न पर्याप्त बीमा—फिर भी जोखिम सबसे बड़ा।

क्या इनकी जान की कीमत सिर्फ एक प्रेस नोट और मुआवज़े की घोषणा है?

🔥 यूपीपीसीएल मीडिया का सवाल

  • क्या संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा?
  • क्या बिना शटडाउन कार्य कराने की संस्कृति पर रोक लगेगी?
  • क्या संविदाकर्मियों को स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल मिलेगा?

जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक “हादसा” शब्द असलियत को ढकता रहेगा — और मौतों की हैट्रिक जारी रहेगी।

🔥 शटडाउन का झूठ… और 33 केवी लाइन ने ले ली जान?

UPPCL की जांच में खुलासे …. शटडाउन लिए बिना 33 केवी लाइन पर काम, करंट लगने से कर्मचारी की मौत

जांच में गंभीर लापरवाही के संकेत, विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल

राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के तहत हुई ताज़ा विद्युत दुर्घटना ने एक बार फिर “शटडाउन सिस्टम” की पोल खोल दी है। विभागीय जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अंतर्गत 33 केवी लाइन पर कार्य के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक कर्मचारी की मौत के मामले में प्रारंभिक विभागीय जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, नेवाडा से सेक्टर-25 होते हुए कल्याणपुर जा रही 33 केवी लाइन का एक एक्सटेंशन भाग जगरानी के पास पिछले दो–तीन दिनों से खराब था। उसे ठीक कर “डंपर बांधने” का कार्य प्रस्तावित था।

मौके पर मौजूद टीजी-2 धीरज रावत द्वारा कथित रूप से यह कहा गया कि शटडाउन ले लिया गया है और कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। हालांकि, जांच में पाया गया कि न तो विधिवत शटडाउन लिया गया था और न ही सेक्टर-25 स्थित यार्ड को खोला गया था। लाइन में सप्लाई चालू थी।

इसी दौरान कार्य शुरू होते ही कर्मचारी करंट की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया। उसे बचाया नहीं जा सका।

हादसे के बाद कर्मचारियों के मौके से हटने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, दुर्घटना के बाद मौके पर मौजूद दो अन्य कर्मचारी, जिनमें एक अन्य टीजी-2 धीरज यादव भी बताए जा रहे हैं, घटनास्थल से हट गए। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

तकनीकी प्रक्रिया पर सवाल

  • विद्युत विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी हाईटेंशन लाइन पर कार्य प्रारंभ करने से पहले लिखित शटडाउन, संबंधित यार्ड की ओपनिंग, अर्थिंग और “परमिट टू वर्क” की प्रक्रिया अनिवार्य होती है।
  • यदि जांच में यह स्थापित होता है कि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो यह केवल तकनीकी चूक नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी।

मुआवजे से बड़ा सवाल जिम्मेदारी का

दुर्घटना के बाद विभागीय स्तर पर मुआवजे और कार्रवाई की चर्चा है, लेकिन मृतक के परिजनों के लिए यह क्षति अपूरणीय है।

अब प्रमुख प्रश्न यह है कि

  • शटडाउन की पुष्टि किस स्तर पर की गई थी?
  • रजिस्टर और लॉगबुक की जांच कब सार्वजनिक होगी?
  • क्या संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया जाएगा?

फिलहाल विभागीय जांच जारी है। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शटडाउन प्रणाली कागज़ों तक सीमित रह गई है, और क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन जमीनी स्तर पर सुनिश्चित किया जा रहा है?

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  • UPPCL MEDIA

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