अमौसी जोन में सामूहिक निलंबन पर बवाल – ऊर्जा मंत्री से मिले जेई संगठन, प्रबंधन पर गंभीर सवाल
लेसा अमौसी जोन में जूनियर इंजीनियरों और प्रोन्नत अभियंताओं के खिलाफ की गई सामूहिक निलंबन और संबद्धीकरण की कार्रवाई अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गई है। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा से मिला और वर्ष 2023 की सांकेतिक हड़ताल के बाद बनी सहमतियों के बावजूद जारी “उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों” को तत्काल समाप्त करने की मांग की।

संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष इं. गोपाल वल्लभ पटेल ने साफ कहा कि अमौसी जोन में की गई सामूहिक कार्रवाई वास्तविक समस्या से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उनका आरोप है कि प्रबंधकीय स्तर पर संसाधनों की भारी कमी रही, लेकिन जिम्मेदारी फील्ड इंजीनियरों पर डाल दी गई।
आंकड़े खुद बोल रहे हैं
अमौसी जोन के अंतर्गत मोहनलालगंज से मलिहाबाद तक लगभग 100 किलोमीटर का विस्तृत क्षेत्र आता है। यहां 33/11 केवी के 53 उपकेंद्र, 20 उपखंड और 7 खंड कार्यालय संचालित हैं। लेकिन नए संयोजनों के निर्गमन के लिए मात्र 1 अधिशासी अभियंता, 3 उपखंड अधिकारी और 3 जूनियर इंजीनियर तैनात थे।
15 नवंबर 2025 से लागू नई वर्टिकल व्यवस्था के बाद लगभग 13,760 नए संयोजनों के आवेदन प्राप्त हुए। प्रतिदिन औसतन 135 आवेदन। इसके बावजूद लगभग 10,473 स्थलीय निरीक्षण किए गए। एक-एक जूनियर इंजीनियर को प्रतिदिन 35 से 40 निरीक्षण और तकनीकी संभाव्यता रिपोर्ट तैयार करनी पड़ रही थी।
सवाल यह है कि क्या इतनी सीमित मैनपावर में यह लक्ष्य व्यवहारिक था? यदि नहीं, तो सामूहिक निलंबन किस आधार पर?
संसाधन नहीं, लेकिन अपेक्षा असीमित
संगठन का आरोप है कि किसी भी जूनियर इंजीनियर का निश्चित भौगोलिक क्षेत्र तय नहीं था। एक ही दिन में 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती थी। पर्याप्त वाहन और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही OTS कैंप, IGRS, राजस्व वसूली और मीटर इंस्टॉलेशन जैसी जिम्मेदारियां भी इन्हीं पर थीं।
यानी सिस्टम ने बोझ बढ़ाया, संसाधन नहीं दिए — और फिर परिणाम अपेक्षित न होने पर दंडात्मक कार्रवाई कर दी।
गणतंत्र दिवस पर सम्मान, एक माह बाद निलंबन
सबसे चौंकाने वाला मामला वह है, जिसमें एक जूनियर इंजीनियर को गणतंत्र दिवस पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति-पत्र दिया गया और 25 फरवरी 2026 को उन्हीं पर लापरवाही का आरोप लगाकर निलंबन कर दिया गया। यह घटनाक्रम कर्मचारियों के मनोबल पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। विशेष रूप से जूनियर इंजीनियर रविंद्र कुमार को गणतंत्र दिवस पर उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रशस्ति-पत्र दिया गया। लेकिन 25 फरवरी 2026 को उन्हीं पर लापरवाही का आरोप लगाकर निलंबन कर दिया गया।
यह घटनाक्रम कई कर्मचारियों के बीच संदेश दे रहा है कि “प्रशंसा अस्थायी, दंड त्वरित”।
UPPCL Media का तीखा प्रश्न
- क्या यह कार्रवाई वास्तव में कार्यकुशलता सुधारने के लिए है या फिर प्रबंधकीय कमियों को ढंकने का प्रयास?
- क्या वर्टिकल व्यवस्था को लागू करने से पहले जमीनी हकीकत का आकलन किया गया था?
- क्या पोर्टल डेटा और वास्तविक कार्यप्रगति की निष्पक्ष जांच होगी?
ऊर्जा मंत्री से हुई मुलाकात के बाद अब नजर इस पर है कि क्या निष्पक्ष जांच के आदेश होंगे या फिर फील्ड इंजीनियरों पर ही कार्रवाई की गाज गिरती रहेगी।
अमौसी जोन का यह प्रकरण केवल एक जोन की कहानी नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक सोच का आईना है जहां संसाधनों की कमी का खामियाजा सबसे नीचे खड़े कर्मचारी को भुगतना पड़ता है।
UPPCL Media | विशेष रिपोर्ट








