वरिष्ठ लेखाधिकारी का आरोप — नियमों के विपरीत स्थानांतरण, वेतन रोका गया, हाईकोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें वरिष्ठ लेखाधिकारी सिद्धार्थ भटनागर के साथ विभागीय स्तर पर कथित अनियमितता और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में उनकी पत्नी ने शासन को विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजकर जांच और न्याय की मांग की है।

पद समाप्त दिखाकर स्थानांतरण का आरोप

शिकायत के अनुसार जल विद्युत स्कंध में वरिष्ठ लेखाधिकारी का केवल एक स्वीकृत पद था, जिसे विभाग ने “शून्य” घोषित कर दिया और उसी आधार पर भटनागर का स्थानांतरण हरदुआगंज (अलीगढ़) परियोजना में कर दिया गया।
प्रार्थना-पत्र में यह भी कहा गया है कि ताप विद्युत स्कंध में इसी श्रेणी के कई पद स्वीकृत होने के बावजूद वहां तैनाती नहीं दी गई।

दुर्घटना के दौरान भेजा गया दूरस्थ परियोजना

दस्तावेजों में उल्लेख है कि मार्च 2025 में सड़क दुर्घटना में भटनागर के हाथ की हड्डी टूट गई थी और उनका उपचार चल रहा था। आरोप है कि चिकित्सकीय स्थिति से अवगत होने के बावजूद विभाग ने ज्वाइनिंग का दबाव बनाया और वेतन भी रोक दिया गया।
परिवार का कहना है कि इससे मानसिक और आर्थिक परेशानी बढ़ी।

पदोन्नति और वरिष्ठता पर भी सवाल

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठता सूची में आगे होने के बावजूद पदोन्नति रोकी गई और दोबारा परीक्षा कराई गई। बाद में पदोन्नति दी गई, लेकिन दूसरे अधिकारी को पहले लाभ दे दिया गया। इसे नियमों के विपरीत बताया गया है।

हाईकोर्ट आदेश के बाद भी विवाद

मामले में उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में याचिका दाखिल की गई थी। अदालत ने निर्धारित समय में शिकायत पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। आरोप है कि तय समयसीमा के बाद भी विभाग ने संतोषजनक निर्णय नहीं दिया और प्रतिकूल रिपोर्ट लगा दी गई।

जांच की मांग

परिवार ने ऊर्जा विभाग और शासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

वहीं विभागीय पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

(समाचार जारी — विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा)

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