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यूपी के बिजली विभाग में औद्योगिक शांति बहाली की बड़ी पहल या फिर कर्मचारी संगठनों की मान्यता का नया संघर्ष?: मुख्यमंत्री से लेकर ऊर्जा मंत्री तक पहुंचा 6 सूत्रीय मांगपत्र!

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लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026 | UPPCL MEDIA विशेष रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच औद्योगिक संबंधों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। विद्युत विकास एवं संयुक्त कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश ने 30 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, मुख्य सचिव और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष को संबोधित करते हुए छह सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है।

समिति के अध्यक्ष सुरेश चंद्र सिंह द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में बिजली विभाग में स्थायी औद्योगिक शांति स्थापित करने, कर्मचारी संगठनों को मान्यता देने, ट्रेड यूनियन कानून के अनुपालन और वर्ष 2023 की हड़ताल से जुड़े विवादों का समाधान करने की मांग उठाई गई है।

लेकिन इस पत्र में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर बिजली विभाग में कर्मचारी संगठनों की मान्यता और औद्योगिक संबंधों को लेकर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं, जिनके समाधान के लिए अब शासन के सर्वोच्च स्तर तक गुहार लगाई जा रही है?

छह सूत्रीय मांगपत्र में क्या-क्या उठाए गए मुद्दे?

1\. ट्रेड यूनियन कानून के तहत मान्यता की मांग

समिति ने प्रदेश के वर्कर श्रेणी के कार्मिकों के लिए श्रम नीतियों और ट्रेड यूनियन कानून के अंतर्गत तथा पर्यवेक्षकीय/प्रबंधकीय संवर्ग एवं अन्य संवर्गों के सेवा संगठनों के लिए उत्तर प्रदेश सेवा संगठन मान्यता संबंधी नियमावली, 1972 (यथा संशोधित) के अंतर्गत पंजीकरण कराकर मान्यता प्रदान करने की मांग की है।

2\. ऊर्जा अधिनियम 2003 के तहत संगठनों के प्रशिक्षण की व्यवस्था

पत्र में विद्युत प्रशिक्षण संस्थान, सरोजनी नगर में मान्यता प्राप्त संघों एवं संगठनों के प्रांतीय अध्यक्षों और महामंत्रियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था कराने की मांग की गई है। इसमें अनिवार्य सेवा अधिनियम और ऊर्जा अधिनियम 2003 सहित कार्मिक नीतियों से संबंधित विषय शामिल हैं।

3\. मान्यता नियमावली का कड़ाई से पालन हो

समिति ने मांग की है कि कार्मिक विभाग मान्यता प्राप्त संघों एवं संगठनों से संबंधित नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करे। समस्याओं के समाधान के लिए त्रैमासिक द्विपक्षीय वार्ताओं की व्यवस्था हो, जिससे हड़ताल जैसी परिस्थितियों पर नियंत्रण रखा जा सके।

4\. वर्ष 2023 की हड़ताल के विवादों का समाधान

यह मांगपत्र का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण बिंदु है।

समिति ने वर्ष 2023 में हुई प्रतीकात्मक एवं दुर्भाग्यपूर्ण हड़ताल से उत्पन्न परिस्थितियों, औद्योगिक अशांति और विद्युत आपूर्ति में व्यवधान का उल्लेख किया है।

पत्र में दावा किया गया है कि अनिवार्य सेवा अधिनियम तथा लोकहित में हड़ताल पर प्रतिबंध के बावजूद उत्पन्न परिस्थितियों के संदर्भ में उच्च न्यायालय, प्रयागराज के निर्देशों के अनुपालन सहित ऊर्जा मंत्री, उत्तर प्रदेश और कथित संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते से संबंधित विवादों का समाधान किया जाए।

साथ ही कार्मिकों के विरुद्ध विभागीय एवं पुलिस में दर्ज मामलों को भविष्य में पुनरावृत्ति न करने की अंतिम चेतावनी देते हुए समाप्त करने पर विचार करने की मांग की गई है।

5\. संगठनों की मान्यता के लिए रेफरेंडम

समिति ने मांग की है कि संघों एवं संगठनों की मान्यता के लिए रेफरेंडम (मतदान) कराया जाए और उसमें बहुमत प्राप्त संगठनों को मान्यता प्रदान की जाए।

इस मांग के लागू होने पर कर्मचारी संगठनों की प्रतिनिधित्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना बन सकती है।

6\. ऊर्जा विभाग की सुधार योजनाओं में संगठनों की भागीदारी

ऊर्जा विभाग में अपेक्षित एवं प्रस्तावित सुधार योजनाओं पर मान्यता प्राप्त संवर्गीय संगठनों, ट्रेड यूनियनों और सेवा संगठनों के साथ वार्ता तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई है।

अब सवाल पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से!

यह पत्र केवल कर्मचारी संगठनों की मान्यता तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से बिजली विभाग में संवाद व्यवस्था, औद्योगिक शांति और कार्मिकों से जुड़े पुराने विवादों के समाधान का मुद्दा भी शासन के सामने रखा गया है।

समिति ने पत्र की प्रतिलिपि प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, निदेशक (मानव संसाधन), श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश तथा संबंधित मान्यता प्राप्त संघों एवं संगठनों को भी भेजी है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन और पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन इस छह सूत्रीय मांगपत्र पर क्या रुख अपनाते हैं।

 UPPCL MEDIA के सीधे सवाल

* क्या बिजली विभाग में कर्मचारी संगठनों की मान्यता के लिए पारदर्शी रेफरेंडम कराया जाएगा?

* क्या 1972 की सेवा संगठन मान्यता नियमावली का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित होगा?

* क्या वर्ष 2023 की हड़ताल से जुड़े विभागीय एवं पुलिस मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होगी?

* क्या बिजली कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए त्रैमासिक द्विपक्षीय वार्ता अनिवार्य की जाएगी?

* क्या ऊर्जा विभाग के प्रस्तावित सुधारों में कर्मचारी संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित होगी?

सबसे बड़ा सवाल: बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी जिन कार्मिकों के कंधों पर है, क्या उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी कोई स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाएगी?

UPPCL MEDIA की टिप्पणी:

बिजली विभाग में सुधार केवल नए सिस्टम, नए टेंडर और राजस्व वसूली से नहीं होगा। जब तक प्रबंधन और कार्मिकों के बीच विश्वास, संवाद और नियमों का समान अनुपालन नहीं होगा, तब तक औद्योगिक शांति स्थापित करना चुनौती बना रहेगा। गांधी के आशीर्वाद से नियम-कानून की किताबें बंद होने का दौर नहीं, अब नियमों के पालन और जवाबदेही का दौर होना चाहिए!

दस्तावेजी आधार: विद्युत विकास एवं संयुक्त कल्याण समिति का पत्रांक 30/10/26, दिनांक 30 अक्टूबर 2026, कुल तीन पृष्ठ।

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31 Oct, 10:17 am

लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026 | UPPCL MEDIA विशेष रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग में कर्मचारियों और प्रबंधन क...

आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।

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