संडीला में बिजली विभाग के नाम पर कथित ठगी का गंभीर मामला, तीन मासूम बच्चों की मां ने अधिशासी अभियंता से लगाई न्याय की गुहार; अब नए अधिशासी अभियंता से कार्रवाई की उम्मीद!
संडीला, हरदोई।
बिजली विभाग के नाम पर आम उपभोक्ताओं को डराकर कथित अवैध वसूली का खेल आखिर कब तक चलता रहेगा? क्या बिजली विभाग का नाम अब कुछ ऐसे लोगों के लिए वसूली का जरिया बन गया है, जिनका विभाग से कोई आधिकारिक संबंध ही नहीं है? संडीला विद्युत वितरण खंड से सामने आया एक मामला विभागीय कार्यप्रणाली और उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मामला एक गरीब विधवा महिला शमा परवीन, पत्नी स्वर्गीय सादिक अली, निवासी अशरफ टोला, संडीला, जनपद हरदोई से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार उनके तीन छोटे बच्चे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। इसी मजबूरी के बीच बिजली कनेक्शन के नाम पर उनके साथ कथित रूप से 11,000 रुपये की ठगी किए जाने का आरोप सामने आया है।
पुराने कनेक्शन को लेकर शुरू हुआ कथित वसूली का खेल
अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड संडीला को दिए गए लिखित प्रार्थना पत्र के मुताबिक, महिला के ससुर के नाम से पुराना बिजली कनेक्शन संख्या 3484541000 था, जिसे वर्ष 2020 से पीडी (PD) बताया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी मामले को लेकर दो व्यक्ति हाफिज अहमद और अमजद हसन महिला के घर पहुंचे। उन्होंने खुद को बिजली विभाग की प्रक्रिया से जुड़ा बताते हुए पुराने कनेक्शन को दोबारा चालू कराने और नया कनेक्शन दिलाने का भरोसा दिया।
महिला का आरोप है कि दोनों व्यक्तियों ने बिजली बिल के रूप में 62,874 रुपये बकाया बताते हुए भुगतान और अन्य रकम की मांग की। साथ ही 20 हजार रुपये जमा कराने की बात कहकर उसे भयभीत किया गया।
₹11 हजार नकद लेने का आरोप, न रसीद न काम का हिसाब!
शिकायतकर्ता के मुताबिक, दोनों व्यक्तियों ने बिजली कनेक्शन दिलाने और समस्या खत्म कराने का भरोसा देकर अपने रिश्तेदारों से उधार लेकर रकम जुटाने को कहा।
आरोप है कि महिला ने हाफिज अहमद को 5,000 रुपये और अमजद हसन को 6,000 रुपये नकद दिए। यानी कुल 11,000 रुपये कथित तौर पर वसूल किए गए।
महिला का कहना है कि इसके बाद उसके परिसर में लगा पुराना मीटर उतारकर नया स्मार्ट मीटर लगा दिया गया, लेकिन मीटर की सीलिंग का प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
हैरानी की बात यह है कि महिला के अनुसार बाद में उससे 9,000 रुपये और मांगे गए तथा 138B के मुकदमे का डर दिखाकर दबाव बनाया गया।
जब SDO से बात हुई तो खुला चौंकाने वाला पहलू!
शिकायत पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब महिला ने अपने बिजली कनेक्शन के पीडी होने की जानकारी मिलने के बाद संडीला के एसडीओ से संपर्क किया, तो कथित तौर पर उसे बताया गया कि जिन दो व्यक्तियों ने उससे पैसे लिए हैं, वे बिजली विभाग के कर्मचारी नहीं हैं और उसे उनके विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि यदि दोनों व्यक्ति विभाग के कर्मचारी नहीं हैं, तो वे बिजली विभाग के नाम पर उपभोक्ताओं से बातचीत करने, कनेक्शन चालू कराने का भरोसा देने और मीटर बदलवाने जैसी गतिविधियों में कैसे शामिल हुए?
क्या विभाग के नाम का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं को गुमराह करने वालों पर पहले कभी प्रभावी कार्रवाई हुई? क्या संडीला खंड में ऐसे लोगों की गतिविधियों की जांच की गई?
पुराने अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल, नए अधिशासी अभियंता से उम्मीद
शिकायतकर्ता की ओर से यह भी सवाल उठाया गया है कि संडीला टाउन में इस तरह की गतिविधियों की जानकारी विभागीय अधिकारियों तक होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यहां वर्तमान में नवनियुक्त अधिशासी अभियंता महोदय से उम्मीद की जा रही है कि वह इस मामले को सामान्य शिकायत समझकर फाइलों में दबने नहीं देंगे, बल्कि निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
सिर्फ संडीला टाउन ही नहीं, शिकायतकर्ता की ओर से संडीला और बेहंदर सहित अन्य क्षेत्रों में भी कथित अनियमितताओं में संलिप्त कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग उठाई गई है।
अब उपभोक्ता चुप नहीं रहेगा!
UPPCL MEDIA सभी बिजली उपभोक्ताओं से अपील करता है कि बिजली विभाग के नाम पर यदि कोई व्यक्ति आपको डराता है, पुराने बिल या पीडी कनेक्शन के नाम पर पैसे मांगता है, नया कनेक्शन दिलाने का लालच देता है अथवा मुकदमे की धमकी देकर नकद वसूली करता है, तो बिना आधिकारिक सत्यापन के किसी को भी पैसे न दें।
हर भुगतान की अधिकृत रसीद अवश्य लें। संबंधित व्यक्ति की पहचान विभागीय कार्यालय से सत्यापित कराएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत सक्षम अधिकारियों तथा पुलिस से करें।
यदि आपके साथ भी इस प्रकार की घटना हुई है, तो अपनी बात सामने रखने से पीछे न हटें। साक्ष्य, भुगतान संबंधी जानकारी, फोटो, वीडियो और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें।
UPPCL MEDIA के सीधे सवाल
1. जब दोनों कथित वसूलीकर्ता विभाग के कर्मचारी नहीं हैं, तो उन्होंने बिजली विभाग के नाम पर उपभोक्ता को कैसे भरोसे में लिया?
2. महिला से लिए गए कथित 11,000 रुपये की जांच कौन करेगा और उसकी वापसी कब होगी?
3. पुराने कनेक्शन, पीडी और नए स्मार्ट मीटर लगाए जाने की पूरी प्रक्रिया की जांच क्यों न कराई जाए?
4. क्या संडीला खंड के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि विभाग के नाम पर कोई बाहरी व्यक्ति उपभोक्ताओं से अवैध वसूली न कर सके?
5. क्या नए अधिशासी अभियंता इस मामले में एफआईआर, विभागीय जांच और पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए ठोस पहल करेंगे?
अब देखना यह है कि संडीला खंड का नया नेतृत्व इस गरीब विधवा महिला की आवाज सुनता है या फिर यह शिकायत भी विभागीय फाइलों में दबकर रह जाती है।
एक गरीब विधवा और उसके तीन मासूम बच्चों के साथ न्याय होना चाहिए। विभाग की छवि खराब करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे विभाग के भीतर हों या बाहर।
UPPCL MEDIA की नजर इस मामले पर बनी रहेगी।
नोट: यह रिपोर्ट पीड़िता के लिखित शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष लिया जाना शेष है। दोष सिद्ध होने तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।
अभी तक का अपडेट
खबर प्रकाशित
2 Nov, 08:34 amसंडीला में बिजली विभाग के नाम पर कथित ठगी का गंभीर मामला, तीन मासूम बच्चों की मां ने अधिशासी अभियंता से लगाई न...
आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
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