33 केवी लाइन में खराबी ने खोली बिजली व्यवस्था की पोल, रातभर ठप रही आपूर्ति; मरम्मत में लगे 13 घंटे, कई इलाकों में शाम तक नहीं लौटी बिजली।
मेरठ। उत्तर प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के दावों के बीच मेरठ में बिजली संकट ने विभागीय तैयारियों और व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के बड़े हिस्से को करीब 13 घंटे तक अंधेरे में रहना पड़ा। बृहस्पतिवार की आधी रात 33 केवी विद्युत लाइन का अंडरग्राउंड केबल बॉक्स फुंकने से बेगमपुल बिजलीघर की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इसका खामियाजा हजारों उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ा।
हालात ऐसे हो गए कि रातभर बिजली गायब रहने से घरों के इन्वर्टर तक जवाब दे गए। शुक्रवार सुबह लोगों को बिजली के साथ-साथ पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ा। सवाल यह है कि शहर की महत्वपूर्ण बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐसी खराबी आने पर वैकल्पिक इंतजाम आखिर कहां थे?
आधी रात को गुल हुई बिजली, कई इलाकों में मचा हाहाकार
जानकारी के मुताबिक, बृहस्पतिवार रात करीब 12 बजे 33 केवी विद्युत लाइन का अंडरग्राउंड केबल बॉक्स अचानक फुंक गया। इसके चलते बेगमपुल बिजलीघर की पूरी आपूर्ति ठप हो गई।
इस बड़े फॉल्ट की चपेट में शहर के कई प्रमुख इलाके आ गए। ब्रह्मपुरी, शारदा रोड, इंद्रानगर, सदर बाजार, बेगमपुल, आबूलेन, पीएल शर्मा रोड, जवाहर क्वार्टर, कल्याणी, आदर्शनगर और बेगमबाग समेत कई क्षेत्रों में अंधेरा छा गया।
रात के समय अचानक बिजली गुल होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। गर्मी, घरेलू जरूरतों और पानी की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
13 घंटे की मशक्कत, फिर भी शाम तक नहीं सुधरे हालात
सबसे गंभीर सवाल बिजली बहाली में लगे लंबे समय को लेकर उठ रहे हैं। करीब 13 घंटे की मशक्कत के बाद शुक्रवार दोपहर मुख्य लाइन को चालू किया जा सका। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मुख्य लाइन चालू होने के बावजूद कई इलाकों में शुक्रवार शाम तक बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी।
इससे विभाग की फॉल्ट मैनेजमेंट व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों पर सवाल खड़े होते हैं। आखिर एक केबल बॉक्स की खराबी को दूर करने में इतनी लंबी अवधि क्यों लगी? क्या समय रहते वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था नहीं की जा सकती थी?
बिजली के साथ पानी का संकट, उपभोक्ताओं की परेशानी किसे दिखेगी?
लंबे बिजली कटौती का सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ा। घरों में इन्वर्टर बंद हो गए और पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हुई। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशान होना पड़ा।
बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने पर उपभोक्ताओं को 33 केवी लाइन में फॉल्ट की जानकारी दी गई। अधिकारियों की ओर से आपूर्ति जल्द बहाल करने का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन मरम्मत में कई घंटे लग गए।
बड़े सवाल, जिनका जवाब बिजली विभाग को देना चाहिए
मेरठ की इस घटना ने बिजली व्यवस्था की तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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33 केवी जैसी महत्वपूर्ण विद्युत लाइन में खराबी आने पर वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?
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बेगमपुल बिजलीघर से जुड़े इतने बड़े क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बहाल करने में करीब 13 घंटे क्यों लगे?
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मुख्य लाइन चालू होने के बाद भी कई इलाकों में शाम तक बिजली सामान्य क्यों नहीं हुई?
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क्या अंडरग्राउंड केबल और केबल बॉक्स का नियमित तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा था?
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उपभोक्ताओं को लंबी कटौती के दौरान समय पर और स्पष्ट जानकारी देने की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दी?
उपभोक्ताओं को आश्वासन नहीं, जवाबदेह बिजली व्यवस्था चाहिए
बिजली विभाग का काम केवल बिल वसूलना और उपभोक्ताओं को कनेक्शन देना नहीं, बल्कि संकट के समय निर्बाध और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना भी है। तकनीकी खराबी किसी भी विद्युत व्यवस्था में हो सकती है, लेकिन ऐसी खराबी के बाद बिजली बहाली में लगने वाला समय और वैकल्पिक व्यवस्था की उपलब्धता ही विभाग की वास्तविक कार्यक्षमता को दर्शाती है।
मेरठ की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिजली व्यवस्था में तकनीकी सुधार और रखरखाव के दावों का लाभ आखिर आम उपभोक्ता तक कब पहुंचेगा?
UPPCL MEDIA का सवाल: जब एक 33 केवी लाइन का फॉल्ट आधे शहर को अंधेरे में डुबो सकता है, तो क्या बिजली विभाग के पास ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की कोई प्रभावी योजना है? संबंधित अधिकारियों को इस मामले में जवाबदेही तय करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
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खबर प्रकाशित
31 Oct, 11:36 am33 केवी लाइन में खराबी ने खोली बिजली व्यवस्था की पोल, रातभर ठप रही आपूर्ति; मरम्मत में लगे 13 घंटे, कई इलाकों...
आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
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