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मेरठ में बिजली कनेक्शनों के नाम पर कथित खेल!: ट्यूबवेल लाइन से दुकानों को सप्लाई, मोबाइल टावर से घरों तक अवैध कनेक्शन का आरोप.

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भोला रोड से पठानपुरा तक उठे सवाल, प्रति कनेक्शन ₹50 हजार की कथित वसूली की चर्चा; विद्युत विभाग के शीर्ष प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल

मेरठ | UPPCL MEDIA विशेष रिपोर्ट

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के विद्युत वितरण खंड परतापुर के अंतर्गत बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, विश्वकर्मा बिजलीघर क्षेत्र में भोला रोड पर ट्यूबवेल श्रेणी (LMV-5) की लाइन से दुकानों को वाणिज्यिक श्रेणी (LMV-2) के कनेक्शन दिए जाने के आरोप हैं। वहीं, पठानपुरा गांव में मोबाइल टावर से 10 से 12 घरों को कथित रूप से अवैध कनेक्शन दिए जाने की बात भी सामने आई है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय अभिलेखों के आधार पर जांच अभी आवश्यक है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय राजस्व, कनेक्शन स्वीकृति प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

भोला रोड: ट्यूबवेल लाइन से दुकानों को कमर्शियल कनेक्शन देने का आरोप

सूत्रों के अनुसार, विश्वकर्मा बिजलीघर के अंतर्गत भोला रोड पर ट्यूबवेल श्रेणी की लाइन से दुकानों को वाणिज्यिक श्रेणी के कनेक्शन दिए जाने की शिकायत है। आरोप है कि नियमानुसार आवश्यक विद्युत लाइन, खंभों और अन्य बुनियादी ढांचे का आकलन कर एस्टीमेट तैयार किया जाना चाहिए था तथा लागू प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित धनराशि जमा होने के बाद ही कनेक्शन जारी किए जाने चाहिए थे।

यदि आवश्यक एस्टीमेट और निर्धारित शुल्क की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो यह जांच का विषय है कि कनेक्शन किस आधार पर स्वीकृत किए गए और विभाग को संभावित राजस्व की हानि हुई या नहीं।

पठानपुरा: मोबाइल टावर से 10–12 घरों को कनेक्शन देने की चर्चा

पठानपुरा गांव में मोबाइल टावर से कथित तौर पर 10 से 12 घरों तक बिजली कनेक्शन दिए जाने का आरोप है। सूत्रों का दावा है कि प्रत्येक कनेक्शन के लिए लगभग ₹50,000 तक की कथित अवैध वसूली की गई।

यह रकम वास्तव में किसने ली, किसे दी गई और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की इसमें भूमिका थी—इन सवालों का जवाब केवल निष्पक्ष जांच, संबंधित उपभोक्ताओं के बयान, भुगतान संबंधी साक्ष्य और विभागीय रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।

अवर अभियंता मनोज कुमार बिंद की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है और उनकी प्रतिक्रिया सामने आना भी आवश्यक है।

सवाल बड़ा है: विभागीय राजस्व या कथित अवैध वसूली?

विद्युत कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, स्वीकृत लोड, लाइन की क्षमता, सुरक्षा मानकों और लागू शुल्क पर आधारित होनी चाहिए। यदि किसी मामले में निर्धारित शुल्क और एस्टीमेट की प्रक्रिया को दरकिनार कर निजी लेन-देन के जरिए कनेक्शन दिए गए, तो यह गंभीर अनियमितता होगी।

ऐसे में विभागीय प्रबंधन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित क्षेत्रों में कितने कनेक्शन जारी किए गए, उनकी श्रेणी क्या है, स्वीकृत लोड कितना है, एस्टीमेट और भुगतान का रिकॉर्ड क्या कहता है तथा मौके पर विद्युत लाइन की स्थिति नियमों के अनुरूप है या नहीं।

गंगानगर प्रकरण पर कार्रवाई कहां तक पहुंची?

रिपोर्ट में गंगानगर क्षेत्र में कथित अवैध लाइन निर्माण से जुड़े पुराने मामले का भी उल्लेख है। आरोप है कि इस प्रकरण में जिम्मेदार बताए जा रहे अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी और अधिशासी अभियंता के विरुद्ध अब तक कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

यदि इस मामले में शिकायतें लंबित हैं, तो विभाग को जांच की स्थिति और की गई कार्रवाई सार्वजनिक करनी चाहिए। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और किसी कथित रिश्वतखोरी में उनकी संलिप्तता का निष्कर्ष साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच जवाबदेही का सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देती रही है। ऐसे में बिजली कनेक्शन, एस्टीमेट और राजस्व से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना विभागीय प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

UPPCL MEDIA के प्रमुख सवाल:

1. भोला रोड पर ट्यूबवेल श्रेणी की लाइन से वाणिज्यिक कनेक्शन दिए जाने की शिकायत की जांच कौन करेगा?
2. पठानपुरा में कथित 10–12 कनेक्शनों के स्वीकृति पत्र, एस्टीमेट और भुगतान रिकॉर्ड की जांच कब होगी?
3. प्रति कनेक्शन ₹50,000 की कथित वसूली के आरोप की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी या नहीं?
4. गंगानगर प्रकरण में जांच और कार्रवाई की वर्तमान स्थिति क्या है?
5. यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी?

निष्कर्ष: बिजली विभाग में पारदर्शिता केवल कनेक्शन जारी करने तक सीमित नहीं हो सकती। प्रत्येक कनेक्शन का रिकॉर्ड, निर्धारित शुल्क, तकनीकी स्वीकृति और राजस्व का हिसाब स्पष्ट होना चाहिए। अब देखना यह है कि विभागीय शीर्ष प्रबंधन इन गंभीर आरोपों पर जांच कराकर तथ्य सामने लाता है या शिकायतें फाइलों में ही उलझी रहती हैं।

महत्वपूर्ण सूचना: यह रिपोर्ट सूत्रों से प्राप्त आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

UPPCL MEDIA | बिजली क्षेत्र की खबरों पर नजर, जवाबदेही की मांग।

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खबर प्रकाशित

29 Oct, 08:25 am

भोला रोड से पठानपुरा तक उठे सवाल, प्रति कनेक्शन ₹50 हजार की कथित वसूली की चर्चा; विद्युत विभाग के शीर्ष प्रबंध...

आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।

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