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बिजली विभाग में संविदा कर्मचारी का आरोप—10 हजार की सैलरी, वेतन: बनवाने के लिए 30 हजार की मांग! मैनपुरी में एक्सईएन कार्यालय पर कर्मचारियों का हंगामा

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मैनपुरी में बिजली विभाग के एक्सईएन कार्यालय पर संविदा कर्मचारियों का हंगामा

₹10 हजार वेतन, ₹30 हजार की कथित मांग! वेतन के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप, एक्सईएन ने आरोपों को बताया निराधार

मैनपुरी। उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में संविदा कर्मचारियों के शोषण और वेतन भुगतान को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मैनपुरी में बिजली विभाग के एक्सईएन कार्यालय में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब संविदा कर्मचारियों ने बकाया वेतन और कथित रिश्वत मांगने के आरोपों को लेकर कार्यालय का घेराव कर दिया।

मामला दिहुली बिजलीघर में तैनात संविदा कर्मचारी अनुपम कुमार से जुड़ा है। अनुपम का आरोप है कि उन्हें पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला है। इतना ही नहीं, उनका वेतन बनवाने के नाम पर कथित तौर पर 30 हजार रुपये की मांग की गई। एक संविदा कर्मचारी की करीब 10 हजार रुपये की मासिक आय के मुकाबले 30 हजार रुपये की कथित मांग ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

यूनियन के नेतृत्व में हुआ घेराव

संविदा कर्मचारी यूनियन के संरक्षक सुबोध कुमार के नेतृत्व में कर्मचारियों ने एक्सईएन कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने बकाया वेतन का भुगतान कराने तथा कथित रिश्वत मांगने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं तो एक्सईएन हंसराज कुमार कौशल ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें कार्यालय से बाहर निकलवा दिया।

एक्सईएन का जवाब भी सवालों के घेरे में

वहीं, एक्सईएन हंसराज कुमार कौशल ने कर्मचारियों के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि अनुपम कुमार की विभाग में नियुक्ति ही नहीं हुई है। ऐसे में वेतन भुगतान का सवाल ही नहीं उठता।

अब इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक तरफ कर्मचारी बकाया वेतन और कथित रिश्वत मांगने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ विभागीय अधिकारी नियुक्ति से ही इनकार कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल: आखिर सच क्या है?

यदि अनुपम कुमार की विभाग में नियुक्ति नहीं हुई थी, तो क्या वह दिहुली बिजलीघर में कार्य कर रहे थे? यदि कार्य कर रहे थे, तो उनकी तैनाती और उपस्थिति का रिकॉर्ड कहां है? और यदि रिश्वत मांगने का आरोप गलत है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?

UPPCL MEDIA की मांग

संविदा कर्मचारियों के वेतन और सम्मान से जुड़ा यह मामला गंभीर जांच की मांग करता है। संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि अनुपम कुमार की नियुक्ति, कार्य अवधि, उपस्थिति रिकॉर्ड, वेतन भुगतान और कथित 30 हजार रुपये की मांग के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

साथ ही, संविदा कर्मचारियों को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर किसी कर्मचारी का शोषण न हो सके।

UPPCL MEDIA का सवाल है कि बिजली विभाग में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों को अपने मेहनताने के लिए भी अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं?

नोट: रिश्वत मांगने और अभद्रता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

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खबर का आगे क्या हुआ?

खबर प्रकाशित

30 Oct, 10:35 am

मैनपुरी में बिजली विभाग के एक्सईएन कार्यालय पर संविदा कर्मचारियों का हंगामा ₹10 हजार वेतन, ₹30 हजार की कथित...

आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।

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