मित्रों नमस्कार! बेबाक निजीकरण का समर्थन नहीं करता... यक्ष प्रश्न कि "क्या निजीकरण का विरोध, कहीं भ्रष्टाचार का समर्थन तो नहीं है"? क्योंकि आज वितरण निगमों का पूरा का पूरा वृक्ष, जड़ से लेकर उसके पत्तों तक, भ्रष्टाचार के असाध्य रोग से ग्रसित हो चुका है। बेहद ही अफसोसजन...
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निजीकरण का विरोध, कहीं भ्रष्टाचार का समर्थन तो नहीं है?
निजीकरण का विरोध, कहीं भ्रष्टाचार का समर्थन तो नहीं है?

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