गोमती नगर जोन में बिलिंग के नाम पर बड़ा खेल! ₹2.78 लाख का बिल घटाकर ₹64 हजार करने का आरोप, खुलासे के बाद मचा हड़कंप

मुख्य अभियंता गोमती नगर जोन के नाक के नीचे बिलिंग में बड़े खेल का आरोप

₹2,78,268 के बिजली बिल को घटाकर मात्र ₹64,421 कर दिया गया। बिलिंग खेल उजागर होते ही विभाग में हड़कंप मच गया। मुख्य अभियंता की कड़ी नाराज़गी और लताड़ के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा दोबारा बिल संशोधन कर पुरानी राशि लगभग ₹2,73,642 फीड कर दी गई, लेकिन इसके बावजूद भी ₹4,626 का अंतर बना हुआ है। आखिर यह अंतर किस आधार पर छोड़ा गया, यह अब बड़ा सवाल बन गया है।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमती नगर जोन में बिजली बिलिंग व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि लाखों रुपये के बिजली बिल को कथित सांठगांठ और सेटिंग के जरिए घटाकर मामूली राशि में बदल दिया गया। मामला सामने आते ही विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया और अब संबंधित अधिकारी दोबारा पुरानी राशि दर्ज कर फीड कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार उपभोक्ता पुष्पेंद्र कुमार सिंह, निवासी शाहपुर पोस्ट चिनहट, लखनऊ, खाता संख्या 7942317651 का बिजली बिल पहले लगभग ₹2,78,268 था, जिसे संशोधित कर मात्र ₹64,421 कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण ने विभागीय कार्यप्रणाली और बिलिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मुख्य अभियंता गोमती नगर जोन के नाक के नीचे इतना बड़ा बिलिंग खेल कैसे संचालित हो गया?, जबकि बिल संशोधन प्रक्रिया में सहायक अभियंता बिलिंग मनीष यादव की भूमिका भी चर्चा में है।

ऐसे शुरू हुआ पूरा मामला

  • जानकारी के मुताबिक फरवरी 2025 में उपभोक्ता का 33,379 यूनिट पर ₹2,09,771 का बिल बना था। इसके बाद अप्रैल 2025 में 33,525 यूनिट पर ₹2,16,968 का बिल जारी हुआ।
  • इसके बाद उपभोक्ता द्वारा मीटर “बैक” कराए जाने की बात सामने आई, जिसके कारण मई 2025 से बिल प्रोविजनल बनने लगे।
  • फिर 3 मार्च 2026 को इंटैली स्मार्ट कंपनी द्वारा पुराना मीटर हटाकर नया स्मार्ट मीटर (मीटर संख्या 9802537) लगाया गया। उस समय हटाए गए मीटर में मात्र 12,450 KWH यूनिट पाई गई, जबकि अप्रैल 2025 तक बिलिंग 33,525 KWH यूनिट पर हो चुकी थी।
  • इस भारी अंतर को लेकर सहायक अभियंता मीटर रामू गुप्ता ने पत्र संख्या 170 दिनांक 28 मार्च 2026 के माध्यम से सहायक अभियंता बिलिंग मनीष यादव को पूरे मामले से अवगत कराया।
  • इसके बाद अप्रैल 2026 में बिल संशोधन करते हुए राशि लगभग ₹2,70,451 कर दी गई और अगले महीने मई 2026 में स्वतः ₹2,73,642 का नियमित बिल भी जनरेट हो गया।

बड़ा सवाल — लाखों का बकाया फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि उपभोक्ता पर दो लाख रुपये से अधिक बकाया होने के बावजूद न तो कनेक्शन काटा गया और न ही कोई सख्त वसूली कार्रवाई की गई।

विभागीय सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला अंदरखाने “सेटिंग” और “मैनेजमेंट” के जरिए संचालित किया गया।

₹1 लाख की डील और बिलिंग सेटिंग के आरोप

सूत्रों का दावा है कि उपभोक्ता पुष्पेंद्र सिंह ने बिल कम कराने के लिए अपने सहयोगी “मिस्टर वर्मा” को ₹1 लाख दिए थे। आरोप है कि इसी नेटवर्क के जरिए बिलिंग सेक्शन में कथित सांठगांठ कर बिल को घटाकर मात्र ₹64,421 कर दिया गया।

हालांकि UPPCL MEDIA GROUP इन वित्तीय लेन-देन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता, लेकिन सवाल यह जरूर उठता है कि आखिर बिना किसी ठोस आधार के लाखों का बिल इतनी कम राशि में कैसे बदल गया?

सूत्रों की मानें तो लगभग ₹75 हजार में यह “डील” फाइनल होने की चर्चा विभागीय गलियारों में तेज है।

खबर चलते ही गोमती नगर जोन में मचा हड़कंप

बताया जा रहा है कि जैसे ही UPPCL MEDIA GROUP ने इस मामले को उठाया, गोमती नगर जोन में अफरा-तफरी मच गई। विभागीय स्तर पर तत्काल हलचल शुरू हुई और बाद में सहायक अभियंता बिलिंग द्वारा फिर से संशोधन कर पुरानी राशि ₹2,73,642 दर्ज कर दी गई।

अब सवाल यह है कि —

  • क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
  • क्या जांच सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी?
  • क्या बिलिंग सिस्टम में चल रहे इस कथित खेल का खुलासा होगा?
  • या फिर जांच कमेटी के नाम पर पूरा मामला दबा दिया जाएगा?

₹2,78,268 के बिजली बिल को घटाकर मात्र ₹64,421 कर दिया गया। बिलिंग खेल उजागर होते ही मचा हड़कंप! मुख्य अभियंता की कड़ी नाराज़गी और लताड़ के बाद अब संबंधित अधिकारी फिर से बिल संशोधन कर पुरानी राशि ₹2,73,642 के आसपास फीड कर दी गई है, लेकिन इसके बाद भी ₹4626 का अन्तर है…

जनता पूछ रही है जवाब

यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक बिल संशोधन का मामला नहीं, बल्कि पूरे बिजली बिलिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

बिजली उपभोक्ताओं में इस पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी है और लोग पूछ रहे हैं कि आखिर विभागीय सिस्टम में बैठे जिम्मेदार लोग किसके संरक्षण में ऐसे खेल कर रहे हैं?

पूरी खबर देखने के लिए जुड़े रहिए — UPPCL MEDIA GROUP

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