MD के आदेश पर MD का ही तमाचा! लेसा में 150 से अधिक कार्यालय सहायकों के तबादले, यूपीपीसीएल के नियमों की उड़ाई धज्जियां

स्थानांतरण करते समय स्वयं पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष स्तर से जारी आदेशों की खुली अनदेखी की जा रही है। संलग्न दस्तावेजों के अनुसार 11 सितंबर 2018 को यूपीपीसीएल की तत्कालीन प्रबंध निदेशक अपर्णा यू. द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों को उनके मंडल/कार्यालय से बाहर स्थानांतरित न किया जाए

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में वर्टिकल प्रणाली लागू होने के बाद लेसा (मध्यांचल विद्युत वितरण निगम) के चारों जोनों में कार्यालय सहायकों के तबादलों की मानो बाढ़ आ गई है। महज एक से डेढ़ महीने के भीतर 150 से अधिक कार्यालय सहायकों का स्थानांतरण कर दिया गया, जिससे विभाग के अंदर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लखनऊ में तैनात इतने बड़े पैमाने पर कार्यालय सहायकों के पास वास्तव में कोई काम ही नहीं था, जो उन्हें इतनी तेजी से इधर-उधर फेंका जा रहा है? या फिर वर्टिकल व्यवस्था की आड़ में मनमाने तबादलों का खेल खेला जा रहा है।

IAS APARNA U Ex MD UPPCL
IAS APARNA U Ex MD UPPCL

मामला और गंभीर इसलिए हो जाता है क्योंकि स्थानांतरण करते समय स्वयं (पूर्व में जारी) पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष स्तर से आदेशों की खुली अनदेखी की जा रही है। संलग्न दस्तावेजों के अनुसार पत्रांक 955 ज०श० एवं प्र०सु० -01/पकालि/2018-100(1) प्र०सु०/92 दिनांक 11.09.2018 को यूपीपीसीएल की तत्कालीन प्रबंध निदेशक अपर्णा यू. द्वारा स्पष्ट निर्देश कॉरपोरेशन के पत्र संख्या 871 ज०श० एवं प्र०सु० -01/पकालि/2018-100(1) प्र०सु०/92 दिनांक 24.08.2018 के अनुक्रम में दिए गए थे कि लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों को उनके मंडल/कार्यालय से बाहर स्थानांतरित न किया जाए, ताकि कार्य व्यवस्था प्रभावित न हो।

लेकिन लखनऊ में जो कुछ हो रहा है, वह इस आदेश के बिल्कुल विपरीत दिखाई देता है। लेसा के चारों जोनों में कार्यालय सहायकों को बड़े पैमाने पर उनके मूल कार्यस्थलों से हटाकर इधर-उधर भेजा जा रहा है, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि विभाग के भीतर नियमों से ज्यादा मनमर्जी चल रही है।

सूत्रों के मुताबिक कई स्थानांतरण ऐसे भी हैं जिनमें स्थापित प्रशासनिक दिशा-निर्देशों और कॉरपोरेशन के पुराने आदेशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष फैल रहा है और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यूपीपीसीएल के शीर्ष प्रबंधन का स्पष्ट आदेश मौजूद है, तो फिर मध्यांचल डिस्कॉम के स्तर पर इन आदेशों की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं?

क्या यह प्रबंध निदेशक के आदेश पर प्रबंध निदेशक का ही करारा तमाचा नहीं है?

अगर इसी तरह नियमों को ताक पर रखकर स्थानांतरण किए जाते रहे, तो यह न केवल प्रशासनिक अराजकता को बढ़ावा देगा बल्कि पूरे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा देगा।

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