बिजली का इंतजार बना मज़ाक: खंभे लटके, तार झूलते, बच्चे खेलते—पर ‘रोशनी’ अब तक गायब!

गाजीपुर/जलालाबाद।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की जलालाबाद ग्राम पंचायत के छोटे मिआना गांव में बिजली नाम की सुविधा एक सपना बनकर रह गई है। चार साल पहले गांव में बिजली poles और तार तो लगाए गए, लेकिन बिजली कब आएगी—इसका जवाब न तो बिजली विभाग के पास है और न ही जिम्मेदार अफसरों के पास।

गांव की हालत यह है कि कई जगह बिजली के तार जमीन के इतने करीब लटक रहे हैं कि छोटे बच्चे उनमें झूला झूलते हैं। यह न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि एक बड़े हादसे की चेतावनी भी है।

“खंभे तो गाड़ दिए गए, लेकिन आज तक उनसे कोई कनेक्शन नहीं मिला,” – यह कहना है ग्रामीण चंद्रपाल चौहान, बंसराज चौहान और राज नारायण चौहान का। उनका आरोप है कि वोल्टेज हमेशा लो रहता है, और बिजली की आपूर्ति बेहद अस्थिर है। इतना ही नहीं, कई परिवारों को दूसरे इलाकों से अवैध तरीके से तार खींचकर बिजली लेनी पड़ रही है, फिर भी उन्हें हर महीने बिल भरना पड़ता है।

शिकायतों का अंबार, कार्रवाई शून्य

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार विभागीय अफसरों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन और झूठी तसल्ली मिली। “अधिकारी फोन पर सिर्फ बात घुमा देते हैं, कोई सुध नहीं लेता,” – यह बात गांव के अधिकतर लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर रही है।

खतरे में जान, विभाग मौन

बिजली के लटके हुए तार और झूलते खंभे कभी भी जानलेवा हादसे में तब्दील हो सकते हैं। इसके बावजूद विभाग की चुप्पी कहीं न कहीं घोर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है।


🔴 अब सवाल यह है — क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है, तब जाकर बिजली विभाग जागेगा?

📢 UPPCL मीडिया की मांग:
बिजली विभाग तत्काल इस गांव की स्थिति की जांच करे और अविलंब कनेक्शन, खंभों की मरम्मत व तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर ठीक करे।

  • UPPCL MEDIA

    "यूपीपीसीएल मीडिया" ऊर्जा से संबंधित एक समाचार मंच है, जो विद्युत तंत्र और बिजली आपूर्ति से जुड़ी खबरों, शिकायतों और मुद्दों को खबरों का रूप देकर बिजली अधिकारीयों तक तक पहुंचाने का काम करता है। यह मंच मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों की गतिविधियों, नीतियों, और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर केंद्रित है।यह आवाज प्लस द्वारा संचालित एक स्वतंत्र मंच है और यूपीपीसीएल का आधिकारिक हिस्सा नहीं है।

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