सभी कमेटी बनी द्वारा अधिशासी अभियंता को दोषी करार देने के बाद भी अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं?

बाराबंकी जिला में दूसरे डिविजन क्षेत्र में जाकर लॉ कालेज को 150 केवीए कनेक्शन को ऊर्जाकृत करने प्रकरण सम्बन्धित सभी कमेटी बनी द्वारा अधिशासी अभियंता को दोषी करार देने के बाद भी अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं?

1. संयोजन को ऊर्जीकृत करने के पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (MHAI) से परमिशन नहीं ली गई है। बिना परमिशन के अंडरग्राउंड केबिल डाल दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जल्द ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (MHAI) द्वारा अभियोग पंजीकृत कराई जाएगी।

2. मध्यांचल मुख्यालय के क्वॉलिटी सेल द्वारा अंडरग्राउंड केबिल को वेव ऑफ करने का अप्रूवल नहीं दिया गया… बल्कि निर्देशित किया गया कि केबल की जांच करा ली जाए उसके उपरान्त ही संयोजन चालू किया जाए… लेकिन अधिशासी अभियंता ने मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता को गुमराह करते हुए अपने स्पष्टीकरण में लिखा हैं कि केबिल की लागत 2 लाख से कम हैं… इसलिए केबिल की जांच कराया जाना आवश्यक नहीं है, जबकि प्रबन्ध निदेशक मध्यांचल का आदेश है कि प्राक्कलन में जिस सामान की लागत 2 लाख से अधिक हैं, उसकी जांच होना अति आवश्यक है।

3. अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्पष्टीकरण में लिखा गया है कि अवर अभियन्ता के द्वारा अपने टीएफआर में नहीं लिखा गया है कि उक्त परिसर पर कोई संयोजन रामसनेही घाट डिवीजन से चल रहा है जबकि अवर अभियन्ता एवं द्वारा संयुक्त रूप से अधीक्षण अभियंता महोदया को लिखित रूप से बताया गया है एवं उनके टीएफआर में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि उसी परिसर पर एक अन्य संयोजन राम सनेही घाट डिवीजन से चल रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि अधिशासी अभियंता द्वारा फर्जी तथ्यों के आधार पर उच्चाधिकारियों को गुमराह कर संयोजन निर्गत किया गया है और अपना बचाव किया जा रहा है।

4. अधिशाषी अभियंता द्वारा स्पष्टीकरण में बताया गया हैं कि प्रबन्ध निदेशक – मध्यांचल द्वारा जोन से गठित जांच समिति द्वारा सुपरविजन के कार्यों में लगने वाले सामान की जांच की जाएगी पर बिना किसी जांच समिति के गठन के साइट पर सामान लगा दिया गया।

5. अधिशासी अभियंता द्वारा अपने पत्र में लिखा गया है कि परिसर अलग है जबकि उसी परिसर में पास की बिल्डिंग से संयोजन चल रहा है। अगर परिसर अलग है तो फिर दूसरे परिसर से बिजली प्रयोग करना बिजली चोरी के अंतर्गत आता है फिर अधिशासी अभियंता द्वारा उपभोक्ता के ऊपर मेहरबानी दिखाते हुए कार्पोरेशन को लाखों रुपए की राजस्व की हानि क्यों पहुंचाई एवं उपभोक्ता के विरूद्ध अभियोग क्यों नहीं कराई गई।

जितनी भी कमेटी बनी है सभी ने अधिशासी अभियंता को दोषी करार दिया है तो अब तक इनके विरूद्ध अभी तक कार्यवाही क्यू नहीं हुई, अगर अधीक्षण अभियंता महोदया को लगता है कि सभी निर्दोष है तो इसका मतलब उनके द्वारा, मुख्य अभियंता द्वारा एवं मध्यांचल द्वारा गठित जांच कमेटी के सभी लोग दोषी है तो फिर इन लोगों पर अभी तक क्यों नहीं कार्यवाही हुई।

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